शिक्षा के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने वाले डॉ. सुरेश ने बताया कि बोर्ड का पाठ्यक्रम पुराना है, इसमें मौलिक सुधार पर काम किया जाएगा। परीक्षा में नकल रोकने और स्कूलों को क्लीन एंड ग्रीन करना प्राथमिकता रहेगी।
प्राथमिकता पर बच्चों के लिए काम होगा, इसके बाद अध्यापक और सरकार। गरीब परिवार से संबंध रखने वाले डॉ. सुरेश के पिता का सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया था। इसके बाद नाना-नानी ने ही उन्हें पढ़ाया।
बीएससी की पढ़ाई के बाद उन्होंने एमए राजनीतिक शास्त्र, एमफिल और पीएचडी की। सुरेश कुमार के दो इंटरनेशनल जरनल पब्लिश हो चुके हैं। इंडियन इंटरनेशन फ्रेंडशिप सोसाइटी ने राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार और दिल्ली पब्लिशिंग हाउस ने बेस्ट सिटीजन के अवार्ड से सम्मानित किया है। ब्यूरो