कहते हैं चांद में भी दाग होता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि चांद की एक सतह बेदाग है। इसरो के स्टडी ऑफ मून प्रोजेक्ट पर काम कर रहे धर्मशाला के वैज्ञानिक ने चंद्रयान सेटेलाइट से मिले डाटा पर शोध के बाद दावा किया है कि चंद्रमा की अगली सतह पर तो दाग है लेकिन पिछली सतह पर दाग नहीं हैं।
उनके शोध ये यह बात सामने आई है कि हमें चंद्रमा की पिछली सतह दिखाई ही नहीं देती है। पृथ्वी और चंद्रमा की रोटेशन एक जैसी है। इनकी गति भी बराबर है, ऐसे में हमें चंद्रमा की अगली सतह की दिखती है।
वंबर 2016 में इसरो ने धर्मशाला कॉलेज में भूगर्भ विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील धर को प्रोजेक्ट का जिम्मा सौंपा। उन्हें चंद्रमा के ओरियंटल बायसन और मूंस रमकस दो हिस्से पर शोध का कार्य मिला है।
इसमें चंद्रमा पर चट्टानों, पर्वत शृंखलाओं, दबे हुए क्षेत्र (करिएटर्स) सहित पानी की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके लिए चंद्रयान से करीब 90 फीसदी डाटा एकत्रित कर उन्हें मुहैया करवाया गया है। इसी डाटा के आधार पर उन्होंने दावा किया है। डॉ. धर के अनुसार चंद्रमा के दो हिस्सों पर वे एक सप्ताह के भीतर शोध कार्य शुरू कर देंगे।