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हिमाचल में नौकरी छोड़ रहे हैं डाक्टर

Thu, 17 Apr 2014 08:59 AM IST
बयूरो/ अमर उजाला, शिमला
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विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझते हिमाचल से डाक्टर भाग रहे हैं। पिछले एक साल में 20 से ज्यादा विशेषज्ञ चिकित्सक नौकरी छोड़ गए हैं। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान आईजीएमसी शिमला में ही रजिस्ट्रार नहीं हैं। स्वास्थ्य मिशन के फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (एफआरयू) में विशेषज्ञ डाक्टरों का अकाल है। आईजीएमसी में इस वक्त रजिस्ट्रार के 35 से ज्यादा पद खाली हैं। सीटीवीएस को छोड़ शेष किसी भी सुपरस्पेशिलिटी विभाग में पर्याप्त रेजिडेंट डाक्टर नहीं हैं।
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कुल्लू से बाल रोग विशेषज्ञ डा. अक्षत चंदेल छोड़ गए। बाल रोग में पीजी डा. सुरजीत भारद्वाज को सरकार ने जब जबरदस्ती रिकांगपिओ भेजा तो वे भी 3 साल की ईओएल पर दिल्ली चले गए। पूर्व भाजपा सरकार के दौरान रोहडू भेेजे गए डा. अरुण शर्मा ने भी नौकरी छोड़ दी।

गाइनी में पीजी डा. मालती जोशी ने ज्वाइन ही नहीं किया। राज्य सरकार की ओर से अनुबंध पर नियुक्त डा. गरिमा ठाकुर ने चमियार पीएचसी, डा. मेघना डोगरा ने बनीखेत और डा. तुहिना गोयल ने परागपुर पीएचसी से नौकरी छोड़ी।
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304 विशेषज्ञ चाहिए, हैं सिर्फ 5

हिमाचल के सामुदायिक अस्पतालों में इस समय 304 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद है, लेकिन हैं सिर्फ पांच। यहां 76 महिला रोग विशेषज्ञ चाहिए, लेकिन एक भी नहीं है। बाल रोग विशेषज्ञ केवल 2 हैं। राज्य सरकार ने ये आंकड़े भारत सरकार को भी दिए हैं।

मंडी में 8 सर्जन और 1 एनास्थिस्टमंडी जोनल अस्पताल में वर्तमान में 2 सर्जन, 3 आर्थो स्पेशलिस्ट और 3 गाइनीकॉलोजिस्ट हैं, लेकिन मरीजों को ऑपरेशन के लिए एनास्थिस्ट एक है। बिलासपुर अस्पताल में एक भी नहीं है। ऑपरेशन का रोगी आने पर एनास्थिस्ट बाहर से हायर करते हैं।
क्या है नौकरी छोड़ने की वजह मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के महासचिव डा. जीवानंद चौहान कहते हैं कि डाक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया ठीक नहीं है। रूरल में सेवाएं देने के लिए विशेषज्ञ को जहां भेजा जाता है, वहां न चपरासी होता है, न ही संसाधन। पे स्केल भी केंद्रीय सेवाओं से कम है।
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