विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझते हिमाचल से डाक्टर भाग रहे हैं। पिछले एक साल में 20 से ज्यादा विशेषज्ञ चिकित्सक नौकरी छोड़ गए हैं। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान आईजीएमसी शिमला में ही रजिस्ट्रार नहीं हैं। स्वास्थ्य मिशन के फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (एफआरयू) में विशेषज्ञ डाक्टरों का अकाल है। आईजीएमसी में इस वक्त रजिस्ट्रार के 35 से ज्यादा पद खाली हैं। सीटीवीएस को छोड़ शेष किसी भी सुपरस्पेशिलिटी विभाग में पर्याप्त रेजिडेंट डाक्टर नहीं हैं।
कुल्लू से बाल रोग विशेषज्ञ डा. अक्षत चंदेल छोड़ गए। बाल रोग में पीजी डा. सुरजीत भारद्वाज को सरकार ने जब जबरदस्ती रिकांगपिओ भेजा तो वे भी 3 साल की ईओएल पर दिल्ली चले गए। पूर्व भाजपा सरकार के दौरान रोहडू भेेजे गए डा. अरुण शर्मा ने भी नौकरी छोड़ दी।
गाइनी में पीजी डा. मालती जोशी ने ज्वाइन ही नहीं किया। राज्य सरकार की ओर से अनुबंध पर नियुक्त डा. गरिमा ठाकुर ने चमियार पीएचसी, डा. मेघना डोगरा ने बनीखेत और डा. तुहिना गोयल ने परागपुर पीएचसी से नौकरी छोड़ी।