केंद्र सरकार ने वन रैंक वन पेंशन के नाम पर पूर्व सैनिकों को झुनझुना दिया है। केवल राजनीतिक लाभ और एक व्यक्ति को हीरो बनाने के उद्देश्य से सारी कवायद की गई।
केंद्र सरकार ने केवल इन प्रिंसिपल मांग को स्वीकार किया है। 500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
इस संबंध में कोई अधिसूचना अभी तक नहीं हुई है। यह पूर्व सैनिकों के साथ सबसे बड़ा धोखा है। थल सेना के पूर्व अध्यक्ष एवं गाजियाबाद से भाजपा प्रत्याशी जनरल वीके सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में खुलासा किया।
पूर्व जनरल ने कहा कि 2011-12 में आंकलन के अनुसार बेसिक जरूरत करीब 3000 करोड़ रुपये की थी, कट ऑफ तय होने पर राशि बढ़ भी सकती है।
पूर्व सेनाध्यक्ष्ा ने घोषणाओं पर उठाए सवाल
फरवरी मध्य में कुछ पूर्व सैनिकों को राहुल गांधी से मिलाया जाता है और वन रैंक वन पेंशन देने पर सहमति जताते हैं। बजट में घोषणा भी कर दी जाती है। इससे दो सवाल खड़े होते हैं।
क्या बजट में वन रैंक वन पेंशन को पहले से शामिल किया गया था। राहुल गांधी ने बजट लीक किया और उन्होंने पूर्व सैनिकों को आश्वस्त किया।
यदि बजट में मांग पहले शामिल नहीं थी तो अंतिम समय में किस आधार पर बजट में शामिल हुई। वित्त मंत्री को इन सवालों के जवाब देने होंगे।
एक सार होनी चाहिए हमारी नीति
पड़ोसी देशों की हरकतों पर कहा कि देश की नीति एक सार होनी चाहिए, लचीली नहीं।
पड़ोसी को पता हो कि उसकी हिमाकत का क्या जवाब मिलेगा, तभी असर होगा। अन्यथा लचीली नीति का पड़ोसी लाभ उठाएंगे।
उन्होंने कहा कि सेना के सभी जवान मताधिकार का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। प्रोक्सी वोट, पोस्टल बैलेट सिस्टम विफल हो गए हैं। नई प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता है, जिससे अपने स्थान से जवान मतदान में भाग ले सकें।
पूर्व जनरल वीके सिंह ने कहा कि कैप्टन विक्रम बत्तरा और उनके परिवार को सेल्यूट करते हैं। कैप्टन बत्तरा और उनके परिवार की बहुत इज्जत है। कैप्टन बत्तरा परिवार के बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।