हिमाचल प्रदेश में 17 फरवरी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस दौरान ऑपरेशन के साथ-साथ ओपीडी पर भी असर पड़ेगा। मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन अभी दो घंटे पेन डाउन हड़ताल पर है लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से मांगे न माने जाने पर डॉक्टरों ने 16 फरवरी को ज्वाइंट एक्शन कमेटी की बैठक करने का फैसला लिया है। इसके बाद डॉक्टर अनिश्चित हड़ताल पर जा सकते हैं।
सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में भी डॉक्टरों को निराशा ही हाथ लगी है। प्रदेश सरकार डॉक्टरों से बात करने को तैयार नहीं है। मेडिकल आफिसर एसोसिएशन के महासचिव पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि एसोसिएशन अब सख्त निर्णय लेगी। डॉक्टर पंजाब की तर्ज पर मूल वेतन पर एनपीए (नॉन प्रैक्टिस अलाउंस) की मांग कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार की ओर से हर वर्ग को कुछ न कुछ वित्तीय लाभ दिए जा रहे हैं, डॉक्टरों को ही इससे वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी डाक्टर साढ़े नौ बजे मेडिकल कॉलेजों, जोनल और सिविल अस्पतालों के परिसर में अपने मांग पत्र लिए खड़े हो रहे हैं, मांगों को लेकर प्रिंसिपल और वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक को ज्ञापन सौंप रहे हैं। साढ़े ग्यारह बजे के बाद ही डॉक्टर ओपीडी में मरीजों का चेकअप हो रहा है। सरकार पर हड़ताल का असर नहीं पड़ रहा है।