दमा सांस की नली से जुड़ी बीमारी है। इसमें एलर्जी होने से सांस नलिकाओं में सूजन आ जाती है। इससे सांस लेने में दिक्कत रहती है। यह अल्प समय तक रहती है, या फिर मौसम बदलने पर परेशान करती है।
विशेषज्ञों का कहा कि बिना दवाओं के भी एक समय तक ये ठीक हो जाती है, फिर भी चिकित्सकों के परामर्श पर इलाज कराएं। दमा के ग्रस्त व्यक्ति को सर्दी के मौसम में रात-सुबह खांसी रहती है।
इसके अलावा खासतौर से सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ सांस लेते वक्त सीटी की आवाज निकलती है। व्यक्ति चलने समय एकदम हांफने लगता है और जल्दी थकावट महसूस होने लगती है।
दूध और इससे बने पदार्थ दमा के साथ नहीं चल सकते। ज्यादातर लोगों में दमा की 60 फीसदी वजह दूध और दूध से बने पदार्थ ही होते हैं। अगर दमा के मरीज दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन करना बंद कर दें तो उनका आधा रोग अपने आप ठीक हो सकता है।
इसके अलावा केला, कटहल, पकाई हुई चुकंदर न लें। कच्ची चुकंदर ले सकते हैं। मौसमी सेम या फलियां, लोबिया आदि भी नुकसान दायक हैं। सर्दी में शहद से शरीर को आवश्यक गर्मी मिलती है। शहद श्वसन नली में बलगम को खत्म कर देता है।
शहद और काली मिर्च गर्म पानी के साथ लेने से दमा के दौरे को टाला जा सकता है। अगर यही प्रयोग लगातार किया जाए तो आपको दमा के दौरों से छुटकारा मिल सकता है। नीम के पत्ते को शहद में लपेटकर रोजाना सुबह ले सकते हैं।
भीगी हुई मूंगफली भी श्वसन नली से बलगम को हटा देती है। तुलसी के कुछ पत्ते शहद और काली मिर्च में भिगोकर रख दें। तीन से चार घंटे इन्हें भिगोया रहने दें और फिर पत्तों को चबा लें। इससे दमा का दौरा पड़ने की आशंका बेहद कम हो जाएगी।
जिला आयुर्वेद अधिकारी कांगड़ा डॉ. कुलदीप बरवाल ने कहा कि सर्दी में किसी को सांस लेने में दिक्कत हों तो ठंडा पानी बिल्कुल न पीयें। पानी को कोसा कर ही पीयें। इसके अलावा तुलसी के काढ़े का सेवन करें।
अस्पताल में जांच के बाद लें दवाई
जोनल अस्पताल धर्मशाला में तैनात मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. उदय महाजन ने कहा कि सर्दी में दमा मरीजों को सांस लेने में दिक्कत बढ़ जाती है, ऐसे में बिना डाक्टरी सलाह कोई भी दवाई शुरू न करें। अस्पताल में जांच के बाद ही दवाई लें।