लालसिंगी निवासी हरदयाल ने बताया कि वह पहले ट्रक चलाते थे। उनका पैर सुन्न रहने लगा तो डॉक्टरों को दिखाया। डॉक्टरों ने उनकी बायीं टांग और हाथ का एक अंगूठा काट दिया। वह परिवार में कमाने वाले इकलौते थे।
दोस्त ने मदद की तो दो बेटियों, एक बेटे और पत्नी के साथ सम्मान की जिंदगी जी रहे हैं। अब वह किसी चीज के लिए दूसरों के मोहताज नहीं हैं। वे बताते हैं कि मुश्किल घड़ी में पत्नी ने उनका पूरा साथ दिया और कभी महसूस ही नहीं होने दिया कि वह दिव्यांग हैं।
चालक हरदयाल का कहना है कि दिव्यांगता के चलते परिवहन विभाग में उसका लाइसेंस रिन्यू नहीं हो रहा है। इससे अब उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि वह किसी भी विपरीत स्थिति में टेंपो चलाने में सक्षम हैं। विभाग उनका चालक का परीक्षण ले सकता है। आज तक दिव्यांगता के चलते उनसे कभी कोई हादसा नहीं हुआ।