मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की घोषणाओं के बावजूद प्रदेश में दर्जनों स्कूल अपग्रेड नहीं हो रहे हैं। मुख्यमंत्री प्रदेश के दौरों के दौरान ग्रामीणों की मांग पर स्कूलों को जमा दो करने के लिए घोषणाएं तो कर रहे हैं, लेकिन स्कूल अपग्रेड होने के मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बीते महीनों में प्रदेश के कई स्कूलों को जमा दो अपग्रेड करने की घोषणा की, लेकिन विभागीय जांच के बाद घोषणाएं निरस्त हो रही हैं। सचिवालय स्तर पर बीते कुछ महीनों में दो दर्जन से अधिक स्कूलों को अपग्रेड करने की घोषणाओं को नामंजूर किया गया है।
घोषणा के बाद शिक्षा सचिव संबंधित जिला उपनिदेशक से स्कूलों को अपग्रेड करने के लिए प्रस्ताव मांगते हैं। उपनिदेशक मौके पर जाकर जमा दो के लिए अपग्रेड किए जाने वाले स्कूल में दसवीं में पढ़ने वाले बच्चों का ब्योरा जुटाते हैं।
दसवीं में इतने छात्र होना जरूरी
स्कूल को जमा दो करने के लिए दसवीं में कम से कम 60 बच्चों का होना जरूरी है। जिन स्कूलों में भवन की कमी होती है, वहां के ग्रामीणों से किराए पर कमरे उपलब्ध करवाए जाने का शपथपत्र लिया जाता है। उपनिदेशक पूरा प्रस्ताव बनाकर शिक्षा सचिव को भेजते हैं।
शिक्षा सचिव प्रस्ताव को वित्त महकमे को भेजते हैं। वित्त महकमे से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव दोबारा से मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए जाता है। वित्त महकमे ने अगर प्रस्ताव को मंजूर कर लिया हो तो मुख्यमंत्री स्कूल अपग्रेड करने को हरी झंडी दे देते हैं। अगर वित्त महकमा आपत्ति लगा दे तो मुख्यमंत्री मंजूरी नहीं देते हैं।
मैहली स्कूल के अपग्रेडेशन का मामला फंसा
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
कुछ माह पूर्व मुख्यमंत्री ने शिमला से सटे मैहली स्कूल को अपग्रेड करने की घोषणा की थी। सरकार ने उपनिदेशक से प्रस्ताव भेजने को कहा। विभाग की रिपोर्ट में बताया गया कि मैहली स्कूल में दसवीं में सिर्फ 15 बच्चे हैं। प्रस्ताव को वित्त महकमे को भेजा गया।
वित्त महकमे ने स्कूल को अपग्रेड करने को मंजूरी नहीं दी। मामले को लेकर बीते दिनों मैहली क्षेत्र के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सचिव राकेश शर्मा से मुलाकात की। शिक्षा सचिव राकेश शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि कुछ स्कूल वित्त महकमे के नियम पूरे नहीं करने के चलते अपग्रेड नहीं हो पा रहे हैं।
ऐसे मामलों को दोबारा सरकार से उठाने का आश्वासन दिया। उधर, मैहली के लोगों ने बताया कि स्कूल जमा दो तक नहीं होने के चलते दसवीं में पढ़ने के लिए अधिकांश विद्यार्थी साथ लगते अन्य स्कूलों में चले गए हैं।