यह भी है विवाद की वजह
हड़ताल पर जाने एक अन्य वजह सीमेंट के डंपों को बंद न करना है। ट्रक ऑपरेटरों की मांग है कि नेरचौक, पधर, भोटा, नादौन और धर्मपुर में चल रहे सीमेंट डंपों को बंद किया जाए। कंपनी ने ऑपेटरों की मांग मानने से इन्कार कर दिया। हालांकि, ऑपरेटरों ने दो महीने पहले ही इन डंपों के लिए माल ढुलाई बंद कर दी है।
पांच दिन में ऑपरेटर 1,000 से कम कमाएगा तो खाएगा क्या
बिलासपुर और सोलन के ट्रक ऑपरेटरों ने खारसी में सोमवार को सभा की। खारसी परिवहन सभा के महासचिव दौलत राम ठाकुर ने कहा कि 70 प्रतिशत सीमेंट ढुलाई नेरचौक और बाकी भोटा डंप पर की जाती है। फोरलेन बनने के बाद अन्य डंपों की औसतन दूरी मात्र 60 किमी रह गई है। डंप पर ट्रक चालक एक से डेढ़ घंटे में पहुंच जाता है, लेकिन माल को ट्रक में भरने में दो दिन और उतारने में दो दिन लगते हैं। मालभाड़ा एक हजार से कम बनता है। ऑपरेटर पांच दिन में 1000 रुपये से कम कमाएगा तो खाएगा क्या।