टूरिस्ट सीजन में टैक्सी का धंधा भी चौपट
पेट्रोल कम मिलने से टैक्सी ऑपरेटर भी हुए परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पर्र्याप्त डीजल न मिलने से शहर के लोकल रूटों पर मंगलवार को छह बसें नहीं चल पाईं। इतना ही नहीं टैक्सियों को पूरा पेट्रोल न मिलने के कारण टैक्सी ऑपरेटर लंबी दूरी की बुकिंग नहीं ले पाए। शहर में पेट्रोल और डीजल की किल्लत से बस तथा टैक्सी ऑपरेटरों का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
लोकल निजी बसें रात के समय डीजल भरवाती हैं, ताकि सुबह रूटों पर संचालन समय पर हो सके। सोमवार रात अपने रूट पूरे करने के बाद जब बसें पेट्रोल पंपों पर पहुंची तो पूरा डीजल नहीं मिला। ढली-संजौली बाईपास, ढली सब्जी मंडी, संजौली टनल, विकासनगर और टुटू पेट्रोल पंप पर डीजल नहीं था। बसों के चालक मंगलवार सुबह भी पेट्रोल पंप पर टैंकर पहुंचने का इंतजार करते रहे। टैंकर आने पर भी बसों को मांग के अनुरूप पूरा डीजल नहीं मिला। शिमला प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन के महासचिव सुनील चौहान ने बताया कि डीजल की किल्लत से मंगलवार को छह बसें सुबह के समय रूटों पर नहीं चल पाईं। टंकी फुल करने पर दो से ढाई दिन गाड़ी चल पड़ती है। डीजल न मिलने से गाड़ियां खड़ी हो रही हैं।
टैक्सी ऑपरेटरों के लिए भी बिना पेट्रोल गाड़ियों का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। इन दिनों टूरिस्ट सीजन चरम पर है। टैक्सी चालकों को सिर्फ 500 रुपये का पेट्रोल मिल रहा है। कम पेट्रोल से लोकल साइट सीन के लिए तो गाड़ी चल रही है लेकिन शिमला से मनाली या धर्मशाला के लिए गाड़ी भेजना मुश्किल हो रहा है। टैक्सी ऑपरेटर ज्वाइंट वेलफेयर कमेटी शिमला जिला के उपाध्यक्ष चमन प्रकाश ने बताया कि पंपों पर सिर्फ 500 का पेट्रोल मिल रहा है। पूरा पेट्रोल न मिलने से लांग रूट पर टैक्सी भेजना मुश्किल हो रहा है। दो साल कोरोना से सीजन खराब हुआ इस साल पेट्रोल की किल्लत और जाम की समस्या से सीजन पिट रहा है।