पेयजल संकट के बीच हो रही लीकेज, संकट के बीच वॉशिंग सेंटरों में धुल रही हैं गाड़ियां
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में गहराए पेयजल संकट के बीच एक ओर शहरवासी पीने लायक पानी के लिए तरस रहे हैं तो दूसरी ओर रोजाना लाखों लीटर पानी सड़कों और नालों में बर्बाद बह रहा है।
अकेले पेयजल लाइनों की लीकेज में रोज करीब तीन से चार एमएलडी यानि 30 से 40 लाख लीटर पानी बर्बाद होने का अनुमान है। इसकी सटीक जानकारी अभी कंपनी के पास भी नहीं है। लेकिन शहर में सप्लाई होने वाले 60 से 70 फीसदी पानी की ही बिलिंग कंपनी कर पा रही है। बाकी पानी लीकेज में बह रहा है या फिर चोरी हो रहा है।
परियोजनाओं की मुख्य लाइनों और शहर में बिछी पाइपलाइनों में यह लीकेज हो रही है। बीते दो सालों में कंपनी ने चार से पांच एमएलडी की लीकेज ठीक भी करवाई है लेकिन इसके बावजूद कई जगह लीकेज जारी है। संजौली बाजार में मंगलवार को लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास सार्वजनिक नलके की पाइपलाइन टूटने से दिनभर पानी बर्बाद बहता रहा। शहर में पेयजल संकट के बीच कार वाशिंग सेंटर खुले हैं। साल 2018 में हुए संकट के समय इन पर रोक लगा दी थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया है। इनमें रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। सेंटर संचालक नालों से खुद पानी मंगाने का दावा कर रहे हैं।
सड़क पर बर्बाद बह रहा पानी
सर्कुलर रोड पर मेट्रोपोल पार्किंग के सामने चश्मे का पानी बर्बाद बह रहा है। यहां करीब एक इंच पानी है। इसी तरह शांकली में भी चश्मे का पानी नाले में बह रहा है। शहर में कई और जगह भी चश्मों के पानी का इस्तेमाल नहीं हो रहा। कंपनी चाहे तो इस पानी को शौचालयों के लिए जमा कर सकती है। अभी कंपनी रिज से पीने वाला पानी ही शौचालयों में देती है। रोजाना 20 से ज्यादा टैंकर शौचालयों के लिए भेजे जा रहे हैं। कंपनी जीएम आरके वर्मा ने कहा कि चश्मों के पानी के इस्तेमाल पर काम किया जाएगा।