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प्रदेश में हर अस्पताल के लिए बनेगा डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान

Sun, 14 Oct 2018 12:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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भूकंप के लिहाज से हिमाचल के संवेदनशील होने पर यहां के हर अस्पताल के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान बनेगा। सरकार ने इसके लिए हास्पिटल सेफ्टी नाम से आपदा प्रबंधन योजना अधिसूचित की है। भूचाल से तबाही की स्थिति में प्रदेश के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ का प्रशिक्षण होगा। अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया है कि राज्य में आठ मैग्नीट्यूड का भूकंप आया तो यहां 14.90 लाख लोग घायल हो सकते हैं। 1,88,100 लोगों की जान जा सकती है।

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पांच जिले चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व मनीषा नंदा की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक सभी संबंधित विभाग इस योजना को धरातल पर लागू करेंगे। वे अपने एक्शन प्लान और इसके लिए फंड की मांग को एक महीने के भीतर राजस्व (आपदा प्रबंधन) विभाग को भेजेंगे।

इस योजना के मुताबिक राज्य का स्वास्थ्य विभाग और इसके अधीन चलाए रहे तमाम अस्पताल खुद को ऐसे तैयार करेंगे कि वे किसी भी बड़ी आपदा की स्थिति में लोगों का इलाज करने की स्थिति में रहेेंगे। इसके लिए डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को मद्देनजर रखते हुए भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस स्कीम का दायरा मेडिकल कॉलेजों से लेकर कम्युनिटी हेल्थ सेंटर तक रहेगा। इनमें मॉकड्रिल भी होंगी।
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एक्पोजर विजिट भी होंगे। योजना लागू करवाने को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण प्रमुख रूप से जिम्मेवार होगा। स्वास्थ्य महकमा इस योजना को लागू करने के लिए राजस्व विभाग की आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ से संपर्क में रहेगा। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से भी फंड जुटाने का प्रयास होगा। आपदा प्रबंध सेल इस योजना को लागू करने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन फंड, क्षमता निर्माण ग्रांट आदि से बजट का प्रबंध करेगी। केंद्र सरकार की अन्य एजेंसियों से भी फंड एकत्र करने का प्रयास होगा। 

योजना को लागू करने के लिए अवधि भी तय 
पहले चरण में राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य विभाग के सभी प्रशिक्षण संस्थानों को कवर किया जाएगा। ये मार्च 2019 से पहले कवर होंगे। दूसरे चरण में मार्च 2020 तक सभी जोन अस्पताल और रेफरल अस्पताल कवर किए जाएंगे। अगला चरण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर फोकस रहेगा। ये मार्च 2021 तक कवर किए जाएंगे।

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आपदा प्रबंधन को पंचायतों में यूथ टास्क फोर्स बनेंगी

प्रदेश में भारी बरसात के बाद कटु अनुभवों के बाद आपका प्रबंधन के लिए सरकार आखिकार जाग गई है। आपदा प्रबंधन के लिए पंचायत स्तर पर यूथ टास्क फोर्स बनाई जाएगी ताकि ग्रामीण स्तर पर स्थानीय यूथ शक्ति को साथ लेकर राहत कार्य शुरू किए जा सकें। सरकार राज्य की प्रत्येक पंचायत में युवा टास्क फोर्स बनाएगी ताकि प्रदेश में आपदा के समय राहत कार्यों को चलाने में कोई परेशानी न हो।

राज्य सरकार मान रही है कि आपदा के समय जितनी तत्परता से स्थानीय युवा राहत कार्यों  हाथ बंटा सकते हैं उतना कोई और फोर्स नहीं। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि स्थानीय युवा अपने आसपास के क्षेत्रों से भली भांति परिचित रहते हैं और आपदा के समय इनकी सेवाएं आसानी से ली जा सकती हैं। इसी सोच के कारण प्रदेश सरकार प्रत्येक पंचायत स्तर पर युवा टास्क फोर्स का गठन करने का फैसला किया है।

इस माह के अंत में मुख्यमंत्री टास्क फोर्स गठित करने की योजना शुरू करेंगे। इस योजना के तहत स्थानीय युवाओं की टास्क फोर्स को आपदा प्रबंधन के तहत प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी सरकार करेगी। युवाओं को प्रशिक्षण करके बताया जाएगा कि कैसे राहत कार्य किए जाएंगे और कैसे  लोगों की मदद तत्काल की जा सकेगी। इसके साथ ही आपदा के समय यह युवा टास्क फोर्स इलाके में आपदा प्रबंधन टीमों के साथ मिलकर भी राहत कार्यों में मदद करेगी।

सरकार की योजना है कि आपदा प्रबंधन के समय सरकार युवा टास्क फोर्स की मदद ली जाएगी। आपदा के समय युवा टास्क फोर्स अपनी सेवाएं देगी तो इसकी एवज में वित्तीय लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा पंचायतों को कोई अन्य वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। राज्य के राजस्व विभाग और डीएमसी के विशेष सचिव डीसी राणा कहते हैं कि पंचायत स्तर पर युवा टास्क फोर्स गठित की जा रही है। इसकी मदद आपदा प्रबंधन के दौरान ली जाएगी।
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