ट्रिपल तलाक के खिलाफ आवाज बुलंद कर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली मुस्लिम महिला को कसौली लिटफेस्ट में शामिल होने के लिए परेशानी झेलनी पड़ी। उत्तराखंड से सायरा बानो को आयोजकों ने वक्तव्य के लिए बुलाया था। लेकिन गेट पर तैनात स्टाफ उन्हें पहचान नहीं पाया। ऐसे में वह लौटने को थीं, लेकिन कुछ देर बाद पहचान होने पर उन्हें भीतर बुला लिया गया। सायरा बानो अपने पिता इकबाल के साथ आई थीं। उन्हें ट्रिपल तलाक मामले पर बोलने के लिए कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में बुलाया गया था।
सायरा जैसे ही गेट पर पहुंचीं तो उन्हें गेट पर तैनात आयोजन के स्वयंसेवियों ने अंदर जाने से रोक दिया। उन्हें बताया गया कि उनका नाम एंट्री रजिस्टर में नहीं है। लिहाजा वह भीतर नहीं जा सकतीं। बाद में मीडिया कर्मियों ने सायरा की पहचान से स्वयंसेवियों को अवगत कराया। सायरा बानो ने बताया कि उन्हें उत्तराखंड से यहां ट्रिपल तलाक पर वक्तव्य देने के लिए बुलाया गया है।
वे 11 अक्तूबर से यहां निजी होटल में रह रही हैं। उन्होंने कई बार संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन उनसे किसी ने बात नहीं की और अब उन्हें गेट पर रोक दिया गया। ऐसे में परेशान होकर वह बिना वक्तव्य के ही वापस जाने वाली थीं। वहीं गेट ड्यूटी पर महिला स्वयंसेवक ने कहा कि बहुत से लोग वक्तव्य देने पहुंचे हैं और वे हर किसी को नहीं पहचान सकती हैं। पहचान दिखाने पर सायरा बानो को अंदर जाने की इजाजत दे दी गई थी।
स्पीड पोस्ट से भेजा था पति ने तलाक
सायरा बानो की शादी 2001 में इलाहाबाद में हुई थी। उनके शादी के बाद दो बच्चे हैं। दहेज उत्पीड़न के चलते उनके पति ने स्पीड पोस्ट के माध्यम से उन्हें तलाक भेजा था। जिसके बाद वे इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई के लिए कोर्ट चली गई।
सायरा बानो के अनुसार इस दौरान उन्हें मुस्लिम धर्म गुरुओं ने पथभ्रष्ट की संज्ञा दी, उन पर समझौते के लिए भी दबाव बनाया गया। लेकिन वे अपने निर्णय पर अडिग रही। सायरा बानो का कहना है कि ट्रिपल तलाक के बाद महिला को हलाला से गुजरना पड़ता है अब उनकी अगली लड़ाई इसके खिलाफ होगी।