बारिश का पानी टपकने से खराब हो रही फाइलें
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल संजौली में कक्षा लगाने के लिए कमरे कम पड़ गए हैं। इस कारण स्कूल का स्टाफ आठ सालों से असुरक्षित घोषित किए पुराने भवन में बैठने के लिए मजबूर है। बार-बार शिकायत करने के बाद भी अधिकारी इसकी तरफ ध्यान नहीं दे रहे।
संजौली स्कूल शहर के मुख्य और पुराने स्कूलों में शामिल है लेकिन भवन की खस्ता हालत से विद्यार्थियों और शिक्षकों को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अंग्रेजों के जमाने में बने इस स्कूल के पुराने भवन की दीवारों में मोटी दरारें पड़ी हुई हैं। इससे स्कूल भवन के गिरने का खतरा बना हुआ है। बावजूद इस जर्जर भवन में प्रधानाचार्य सहित अन्य शिक्षकों को बैठना पड़ता है। नए भवन में कम और छोटे कमरों की वजह से पूरी कक्षाएं नहीं लग पा रहीं। स्कूल को दो शिफ्टों में चलाना पड़ रहा है। स्कूल में 600 के करीब विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा बिजली, पानी की भी दिक्कत है। स्कूल का पुराना भवन नगर निगम प्रशासन का है लेकिन नगर निगम प्रशासन भी इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। एमसी भवन का किराया तो पूरा ले रहा है लेकिन सुविधा नहीं दे रहा। शिक्षकों ने बताया कि बारिश के दौरान छत से पानी टपकता रहता है। इससे प्रधानाचार्य कक्ष में रखे जरूरी कागज और फाइलें खराब हो रही हैं। आठ साल पहले ही स्कूल के पुराने भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया था।
कोट
अधिकारियों को इस मामले से अवगत करवा दिया है। स्कूल का पुराना भवन नगर निगम प्रशासन का है। इस वजह से काम शुरू होने में देरी हो रही है। स्कूल का भवन शिक्षा विभाग के पास आते ही इसका कार्य शुरू होने की उम्मीद है।