आरोप था कि बोध राज ने लखनऊ विश्वविद्यालय के नाम पर बीएड की फर्जी डिग्रियां बेची थीं। मामला वर्ष 2001 से 2004 के बीच का है, जब आरोपी ने अपने अन्य सहयोगियों से मिलीभगत कर विभिन्न राज्यों के अभ्यर्थियों से कुल 12.83 लाख रुपये की ठगी की थी। इनमें से 50 से अधिक युवा जिला चंबा के पांगी क्षेत्र से ही संबंधित थे। आरोप है कि अभ्यर्थियों को लखनऊ विश्वविद्यालय में एडमिशन का झांसा देकर फर्जी मार्कशीट्स और डिग्रियां जारी की थीं। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने दोष सिद्ध होने पर बोध राज को सजा सुनाई गई। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी अतिरिक्त जिला न्यायवादी गौरव कुमार ने की।