समुद्रतल से 13,124 फीट की ऊंचाई पर स्थित नीलकंठ महादेव की तपोस्थली पर स्थित पवित्र नीलकंठ झील के अब श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन कर सकेंगे। यह झील जनजातीय जिला के उदयपुर से 52 किमी दूर पहाड़ी पर स्थित है। झील साल में छह महीने तक बर्फ से ढकी रहती है। इस कारण श्रद्धालु यहां तक नहीं पहुंच पाते।
बर्फ हटते ही अब श्रद्धालु सात माह बाद दर्शनों के लिए यहां पहुंच रहे हैं, जबकि प्राकृतिक सुंदरता से लवरेज यह झील सितंबर के बाद बंद पड़ जाती है। जून अंतिम सप्ताह में अब उस ओर प्रवेश खुलते ही दर्शनों के लिए भक्तों की टोली निकल पड़ी है। पुरातन मान्यता और धार्मिक वर्जना की वजह से इस झील की ओर महिलाएं रुख नहीं करती हैं। झील के आसपास सुबह-शाम का तापमान अभी जमाव बिंदु पर है।
बिगड़ते मौसम के बीच रात को यहां ठहरना काफी ठंडक भरा रहता है। नीलकंठ झील का दर्शन कर लौटे वशिष्ठ के लोकेंद्र, राहुल, चंद्रा वैली के सुनील कुमार, वीरेंद्र और राकेश ने कहा कि अभी भी झील का पानी ठंडा होने से स्नान करना मुश्किल है। अत्यधिक ठंड होने के चलते सुबह के समय झील के पानी में बर्फ की परत जम रही है। नीलकंठ झील के पुजारी अमर ने कहा कि पांडवों के अज्ञातवास के समय बनी कूहल आज भी वहां सुरक्षित है। पांडवों ने अपने अज्ञातवास का समय नीलकंठ झील के आसपास भी बिताया था। कूहल से वर्तमान में भी स्वच्छ पानी बहते देखा जा सकता है।