प्रदेश का इस बार का कुल बजट करीब 49 हजार करोड़ रुपये का है। कोरोना वायरस के चलते प्रदेश को अब तक करीब 18 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। बजट व्यय में कर्मचारियों और पेंशनरों के बजट में सरकार चाहकर भी कटौती नहीं कर सकती है। आधे कार्यकाल का निर्बाध संचालन कर चुकी जयराम सरकार भी तमाम सरकारों की तरह कर्मचारियों-पेंशनरों को नाराज कर ढाई साल के बाद के मिशन रिपीट में आंच नहीं आने देना चाहेगी। ऐसे में उपाय एक ही होगा कि विकास का बजट घटाकर ही कर्मचारियों-पेंशनरों के खर्चे पूरे किए जाएं।
सड़कों की मरम्मत तक के लिए जारी नहीं हो रहा बजट
विकेंद्रीयकृत प्लान के तहत ग्रामीण संपर्क सड़कों की मरम्मत तक के लिए भी उपायुक्तों ने बजट जारी करना बंद कर दिया है। अन्य मदों में भी यही स्थिति होने वाली है। सरकार पर पहले से ही करीब 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। कर्ज एक निश्चित सीमा तक ही लिया जा सकता है। केंद्र से भी इस संकट में माकूल मदद की आशा कम है। ऐसे में अधिकारीगण वित्तीय प्रबंधन के चिंतन में जुटे हैं।