संस्थान देंगे भारी भरकम छूट, शेष खर्चा सरकार करेगी वहन
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शहर आठ कोचिंग सेंटरों ने दाखिले पर दी स्वीकृति अमर उजाला ब्यूरो शिमला। बेसहारा बच्चों का आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना अब पूरा होगा। कोचिंग महंगी होने के कारण यह छात्र इन प्रतियोगी परीक्षाओं से बाहर हो जाते हैं।
अब ऐसे बच्चों को प्रदेश सरकार निशुल्क कोचिंग दिलाएगी। इसकी पहल शिमला शहर से होने जा रही है। इसके लिए जिला प्रशासन ने शहर के नामी कोचिंग संस्थानों के साथ संपर्क किया है। इसके लिए सभी कोचिंग संस्थानों ने सहमति जताई है और फीस में भारी छूट देने की बात कही है। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत बेसहारा बच्चों को यह कोचिंग सुविधा मुहैया करवाई जाएगी। अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक वर्मा ने बताया कि इस योजना पर काम शुरू हो चुका है। गौरतलब है कि यूपीएससी, नीट और अन्य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटर भारी भरकम फीस वसूल करते हैं। बेसहारा तो छोड़ो एक मध्यवर्गीय परिवार के लोग भी इसे वहन नहीं कर पाते। कोचिंग सेंटर की सामान्य फीस 1.50 से 2 लाख के बीच है। शहर के नामी कोचिंग संस्थानों ने प्रति छात्र 25 हजार में कोचिंग देने में हामी भर दी है। बाकी फीस सरकार वहन करेगी।
400 बेसहारा बच्चे हैं जिले में
जिला शिमला में करीब 400 बेसहारा बच्चे हैं। इनमें से कई प्रतियोगी परीक्षाओं को देकर प्रशासनिक अफसर बनने के सपने पाले हुए हैं। प्रदेश सरकार ने सभी बेसहारा बच्चों को मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट का दर्जा दिया है। इन सभी बच्चों की देखरेख एवं पढ़ाई का सारा खर्चा सरकार व्यय करेगी। एक बच्चे की कोचिंग का बजट करीब 25 हजार तय है।
कोट
सरकार के आदेश पर प्रत्येक जिले में कोचिंग सेंटर की सूची तैयार की जा रही है। इसके बाद पात्र बच्चों को इन संस्थानों में कोचिंग उपलब्ध करवाई जाएगी। -अनुपम कश्यप, डीसी, शिमला