हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बारहवीं कक्षा को पढ़ाने वाले सैकड़ों प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी हुए हैं। स्कूल शिक्षा बोर्ड परीक्षा से कम परिणाम आने पर शिक्षा निदेशालय ने यह कार्रवाई की है। साल 2015 में घोषित हुए जमा दो कक्षा के विषय वार परीक्षा परिणाम के आधार पर लिखित में कम परिणाम आने के कारण पूछे गए हैं।
डाक से स्कूलों को नोटिस भेजे गए हैं। एक हफ्ते के भीतर शिक्षकों को जवाब देने को कहा है। निदेशक उच्च शिक्षा दिनकर बुराथोकी ने नोटिस जारी किए हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय के आदेशानुसार बीते छह माह में सभी जिला उपनिदेशकों ने स्कूलों का निरीक्षण कर परीक्षा परिणाम के आंकड़े जुटाए हैं। इसी आधार पर कम प्रतिशतता वाले स्कूलों पर शिकंजा कसा है।
प्रदेश के उन सभी स्कूल प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनके विषय में कुल प्रतिशतता बोर्ड की प्रतिशतता से कम है। इस प्रक्रिया के तहत 80 से 86 प्रतिशत तक परिणाम देने वाले प्रवक्ता भी आ गए हैं। इससे पूर्व शिक्षा निदेशालय बोर्ड की विषय वार प्रतिशतता से 25 प्रतिशत कम प्रतिशतता वाले स्कूल प्रवक्ताओं को नोटिस जारी कर जवाब तलबी करता था।
80 फीसदी परिणाम देने के बावजूद नोटिस जारी करने की निंदा- हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने 80 प्रतिशत से भी अधिक परीक्षा परिणाम देने के बावजूद स्कूल प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने की निंदा की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अश्वनी कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरी शर्मा, राजेश सैनी, चेयरमैन मुश्ताक मुहम्मद, महासचिव सुरेंद्र सकलानी, प्रेस सचिव प्रेम शर्मा, बीडी कश्यप, जिला ऊना के अध्यक्ष विकास रतन, बिलासपुर के
महासचिव राकेश भारद्वाज का कहना है कि 80 प्रतिशत से अधिक परीक्षा परिणाम को बेहतर माना जाता है। विभाग द्वारा 70 और 77 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर बच्चों को छात्रवृत्तियां दी जाती हैं। अच्छा परीक्षा परिणाम देने के बावजूद नोटिस जारी होने से अध्यापकों का मनोबल गिरना स्वाभाविक है।
453 स्कूलों में शिक्षक कर रहे गैर शिक्षण काम- स्कूल प्रवक्ता संघ के मुताबिक सरकारी स्कूलों में गैर शैक्षणिक स्टाफ की किल्लत है। प्रदेश में 453 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं, जिनमें सारी फाइलों का कामकाज शिक्षक निपटा रहे हैं।
राज्य में वर्ष 2006 के बाद जितने भी स्कूल स्तरोन्नत हुए और नए खुले हैं, उनमें विभाग ने एक भी क्लर्क तैनात नहीं किया है। नियमों के मुताबिक स्कूल का लेखाजोखा रखने के लिए एक क्लर्क के अलावा वरिष्ठ सहायक और अधीक्षक की तैनाती जरूरी है।