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Shimla News: हिमुडा से विवाद के बाद निगम ने सीएम को लिखा पत्र, मांगी शहर में बनी पार्किंग

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हिमुडा ने कंगनाधार, बैनमोर में बनाई है दो नई पार्किंग, लोक निर्माण विभाग भी बना रहा है पांच बड़ी पार्किंग
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दोनों महकमों की बनी पार्किंग अपने अधीन लेने की तैयारी कर रहा नगर निगम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में हिमुडा और लोक निर्माण विभाग की बनाई नई पार्किंग नगर निगम अपने अधीन लेने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए निगम ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र लिखा है। इसमें शहर में तैयार हो रही दूसरे विभागों की पार्किंग नगर निगम को सौंपने की मांग की गई है।
कंगनाधार और बैनमोर वार्ड के साधनाघाटी में हिमुडा की बनाई पार्किंग भी नगर निगम को सौंपने की मांग की गई है। इन पार्किंग को लेकर निगम और हिमुडा के बीच विवाद भी चल रहा है। हिमुडा का कहना है कि पार्किंग का संचालन कैसे करना है, इसकी अभी नीति तैयार हो रही है। यह पार्किंग हिमुडा ने अपनी जमीन और अपने पैसों से तैयार की है। ऐसे में नगर निगम इस पर अधिकार नहीं जमा सकता। वहीं, निगम का कहना है कि जब हिमुडा ने अपनी संपत्तियां नगर निगम को सौंप दी हैं तो इनके संचालन का अधिकार भी निगम को मिलना चाहिए। कंगनाधार पार्षद रामरत्न वर्मा भी सदन में इस मामले को उठा चुके हैं। उनका कहना है कि उनके वार्ड में हिमुडा की बनाई पार्किंग नगर निगम को मिलनी चाहिए। इसके बाद महापौर सुरेंद्र चौहान ने इन पार्किंग को नगर निगम को सौंपने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। महापौर ने कहा कि इस बारे में पत्र लिखा है। निगम स्मार्ट सिटी मिशन से बनने वाली पार्किंग भी चलाएगा।
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निगम को मिलनी हैं पांच बड़ी पार्किंग
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर में बन रही पांच बड़ी पार्किंग भी निगम ही चलाएगा। एसडीए परिसर कसुम्पटी, टुटू, ऑकलैंड, डेंटल कॉलेज और न्यू ओपीडी ब्लॉक आईजीएमसी के पास बन रही इन पार्किंग का निर्माण लोक निर्माण विभाग कर रहा है। इनमें कसुम्पटी, ऑकलैंड और टुटू की पार्किंग अगले महीने तक तैयार हो जाएंगी। निगम इनके संचालन से कमाई करेगा। शहर में अभी निगम से पार्किंग से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कमाई कर रहा है। यह बढ़कर अब तीन करोड़ के पार पहुंच जाएगी।
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इनसेट
लिफ्ट, छोटा शिमला पार्किंग पर भी होना है फैसला
शहर के लिफ्ट और छोटा शिमला में पीपीपी मोड पर बनी बहुमंजिला पार्किंग ठेकेदार से वापस लेने का मामला भी सरकार के पास विचाराधीन है। यदि सरकार इनके निर्माण की लागत का पैसा देने को मान जाती है तो नगर निगम को इनका कब्जा मिल सकता है।
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