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कमजोर मानसून: हिमाचल में घटने लगा बिजली उत्पादन, दो से पांच लाख यूनिट की कमी

Wed, 08 Sep 2021 01:01 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

प्रदेश में अभी बिजली की कुल मांग 320.66 लाख यूनिट चल रही है। जबकि बैंकिंग और बेची जाने वाले बिजली को निकालने के बाद प्रदेश के पास कुल 314.7 लाख यूनिट ही रह रही है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में कमजोर मानसून से बिजली उत्पादन घटने लगा है। सितंबर के पहले सप्ताह में रोजाना दो से पांच लाख यूनिट बिजली उत्पादन की कमी आना शुरू हो गई है। सेंट्रल शेयर, निजी परियोजनाओं से बिजली लेकर अब प्रदेश की जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। बिजली उत्पादन कम होने से पड़ोसी राज्यों को भी अब अधिक सप्लाई नहीं बेची जा रही है। आने वाले दिनों में बिजली परियोजनाओं में पानी की कमी यूं ही जारी रही तो प्रदेश में भी अन्य राज्यों की तरह बिजली संकट गहरा सकता है।

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प्रदेश में सोमवार शाम तक कुल बिजली उत्पादन 569.04 लाख यूनिट हुआ है। इसमें से 254.34 लाख यूनिट बिजली को बैंकिंग आधार पर अन्य राज्यों को उधार के तौर पर दिया गया है और कुछ सप्लाई बेची जा रही है। प्रदेश में अभी बिजली की कुल मांग 320.66 लाख यूनिट चल रही है। जबकि बैंकिंग और बेची जाने वाले बिजली को निकालने के बाद प्रदेश के पास कुल 314.7 लाख यूनिट ही रह रही है। ऐसे में सोमवार शाम को प्रदेश में 5.96 लाख यूनिट की बिजली मांग के अनुसार कम रही। प्रदेश में सबसे अधिक बिजली की खपत उद्योगों में हो रही है। औद्योगिक इकाइयों से 215.32 लाख यूनिट और घरेलू व अन्य उपभोक्ताओं की ओर से 105.34 लाख यूनिट बिजली की मांग है।

प्रदेश को सेंट्रल शेयर से अभी 206 लाख यूनिट और निजी परियोजनाओं से 146 लाख यूनिट बिजली सप्लाई रोजाना मिल रही है। इसके अलावा बिजली बोर्ड की परियोजनाओं में 103 लाख यूनिट बिजली रोजाना उत्पादित हो रही है। उधर, बैंकिंग पर पड़ोसी राज्यों को तीस सितंबर तक बिजली दी जाएगी। 15 अक्तूबर से हिमाचल इन राज्यों से यह सप्लाई वापस लेगा। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि कम बारिश होने से बिजली परियोजनाओं में बीते कुछ दिनों से उत्पादन कम हुआ है। हालांकि उत्पादन में बहुत अधिक कमी दर्ज नहीं हुई है। आने वाले दिनों में बरसात होने से उत्पादन दोबारा सामान्य होने के आसार हैं। 
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मानसून सीजन में सामान्य से 20 फीसदी कम बरसे बादल
प्रदेश में इस वर्ष मानसून सीजन के दौरान सामान्य से 20 फीसदी कम बादल बरसे हैं। 13 जून को प्रदेश में मानसून ने प्रवेश किया था। सात सितंबर तक प्रदेश में 538.6 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड हुई है। इस अवधि के दौरान 675.9 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना गया है। कुल्लू और मंडी जिला को छोड़कर प्रदेश के शेष दस जिलों में इस वर्ष सामान्य से कम बारिश हुई है।

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