कोरोना को लेकर फील्ड में तैनात कर्मचारियों को वापस बुलाने की तैयारी चल रही है। वर्तमान में प्रदेश में डॉक्टरों, फार्मासिस्ट, नर्सों और अध्यापकों की फील्ड में ड्यूटियां लगाई हैं। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों कोरोना संक्रमण के मामले कम आ रहे हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों की अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में सेवाएं ली जाएंगी। अध्यापकों को भी वापस भेजा जाना है। विभाग का मानना है कि जहां उपचुनाव होना है, वहां तैनात कर्मचारियों को वापस नहीं बुलाया जाएगा। अन्य जिलों में भी एक साथ नहीं, बल्कि धीर-धीरे फील्ड में तैनात कर्मचारी वापस बुलाए जाएंगे।
अगर प्रदेश में कोरोना के मामले बढ़ते हैं या तीसरी लहर आती है तो ऐसी स्थिति में इन कर्मचारियों को वापस भेजा जाएगा। जिला उपायुक्तों ने भी सरकार से स्टाफ को वापस बुलाने की पैरवी की है। हिमाचल के सरकारी अस्पतालों में कोरोना का एक भी गंभीर मामला नहीं है। हालांकि, प्रदेश में प्रतिदिन 2 से 3 लोगों की मौत हो रही है। सरकार का तर्क है यह व्यक्ति किसी अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित है। ऐसे में कोरोना के कारण इनकी मौत हुई है।
प्रदेश में इस समय करीब 13 सौ कोरोना के एक्टिव मामले हैं। प्रतिदिन प्रदेश में डेढ़ सौ नए मामले दर्ज हो रहे हैं, इनमें कोई लोग ऐसे हैं, जिन्हें वैक्सीन लग चुकी है और तीन चार दिन के बाद यह लोग ठीक भी हो रहे हैं। स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने बताया कि वैक्सीन लगाने से कोरोना के मामलों में कमी आई है। कोरोना को लेकर जिन जिलों में ज्यादा मामले आ रहे थे, वहां ज्यादा स्टाफ तैनात किया गया था, कुछेक कर्मियों को वापस बुलाने पर विचार चल रहा है।