हिमाचल हाईकोर्ट में बुधवार को मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) की नियुक्तियों के कानूनी दर्जे पर सरकार ने अपनी अंतिम बहस पूरी कर दी है। अब 27 मई को सतपाल सत्ती की ओर से दायर याचिका पर फिर बहस होगी।
सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में दलीलें रखीं। उन्होंने बताया कि विधानसभा ने 2006 में जो कानून बनाया है, वह संविधान के दायरे में है। इससे किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया गया है। सरकार अपने कार्यों को सुचारु चलाने के लिए ऐसे कानून बना सकती है।
दवे ने कहा कि हिमाचल का जो कानून है, वह असम और मणिपुर से अलग है। हिमाचल में सीपीएस को मंत्रियों वाली सुविधाएं नहीं मिलतीं। बुधवार को अदालत में सीपीएस के कानूनी दर्जे पर सभी पक्षों की तरफ से बहस एक बार पूरी हो चुकी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश विपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ अप्रैल के बाद लगातार इस मामले को सुन रही है। अब 27 मई को सत्ती वाली याचिका पर उनके वकील फिर बहस करेंगे।