फांसी की सजा सुनते ही तीनों हत्यारों के चेहरे पीले पड़ गए। चार साल से न्याय का इंतजार कर रहे युग की मां पिंकी, पिता विनोद कुमार और दादी चंद्रलेखा की आंखों से आंसू छलक पड़े। कोर्ट ने मौत की सजा के आदेशों को कन्फर्मेशन के लिए उच्च न्यायालय भेज दिया।
वहीं, दोषियों को हाईकोर्ट में फैसले को लेकर अपील करने के लिए तीस दिन का समय दिया है। भीड़ कम होने तक सुरक्षा कारणों और फैसले की प्रति देने के लिए दोषियों को कुछ देर के लिए कोर्ट में रोका गया। इसके बाद पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच तीनों को अदालत परिसर से शाम को फिर कंडा जेल ले जाया गया।
शिमला के चर्चित युग हत्याकांड में अदालत ने आईपीसी की धारा 302, 120 बी हत्या और हत्या का षड्यंत्र रचने, 364-ए और 120-बी में फिरौती की मांग करने का दोषी करार देते हुए तीनोें को मौत की सजा सुनाई है। वहीं, धारा 347 में बंधक बनाने का दोषी पाए जाने पर एक साल की सजा और बीस हजार जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना अदा न करने की सूरत में तीन माह की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है। अदालत ने तीनों को धारा 201 और 120-बी के तहत सुबूत नष्ट करने और षड्यंत्र रचने का दोषी होने पर सात साल के कठोर कारावास, 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
जुर्माना अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा होगी। अदालत ने इन दोषियों को आईपीसी की धारा 506 और 120-बी के तहत धमकियां देने और षड्यंत्र रचने पर एक साल के कठोर कारावास और दस हजार जुर्माने की सजा सुनाई। इसमें जुर्माना अदा न करने की सूरत में एक माह की अतिरिक्त जेल होगी।
युग के अपहरण और हत्या के 2014 में हुए मामले की जांच कर रही सीआईडी ने 25 अक्तूबर, 2016 को चार्जशीट अदालत में दायर की। 20 फरवरी 2017 से अदालत में ट्रायल शुरू हुआ।
इसमें कुल 135 में से 105 गवाहों के बयान हुए। छह अगस्त को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने तीनों आरोपियों चंद्र शर्मा, तेजिंद्र पाल और विक्रांत बक्शी को अपहरण और हत्या का दोषी करार दिया और 800 पन्नों का फैसला दिया।
उसके बाद अदालत में सजा पर बहस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांच सितंबर को अदालत ने तीनों को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने करीब 18 माह में इस जघन्य अपराध में अपना फैसला सुना दिया।
युग हत्या मामले के आरोपियों को फांसी की सजा पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि फैसले से कोर्ट के प्रति सम्मान बढ़ा है। उन्होंने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मासूम युग की हत्या से पूरा प्रदेश दुखी हुआ। देश भर में इस घटना की चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि कानून ने बखूबी अपना काम किया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने जैसे ही तीसरे दोषी विक्रांत को फंासी की सजा सुनाई, तो पीछे बैठे परिजनों ने ताली बजाई। हालांकि, उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया। अदालत में ही एक साथ बैठीं युग की मां पिंकी और दादी चंद्रलेखा की आंखों में आंसू आ गए। पिता भी युग को न्याय दिलवाने की इस जंग में फैसला आने पर भावुक हो गए।
अदालत में जज वीरेंद्र सिंह ने चार वर्षीय मासूम के हत्यारों को खड़े होकर सजा सुनाई। दस एक एक कर तीनों की सजा का एलान करने में जज ने दस मिनट का वक्त लिया। सजा पर फैसला सुनाने के बाद जज वीरेंद्र सिंह ने कलम को तोड़कर पीछे की ओर फेंका और सीधे अपने चैंबर की ओर चले गए।
तीनों दोषियों को जब अदालत के सामने पेश किया गया, उस समय अदालत का माहौल बिल्कुल शांत था। अदालत ने एक एक कर तीनों को फांसी की सजा सुनाने की प्रक्रिया शुरू की। सबसे पहले चंद्र शर्मा को फांसी की सजा सुनाई गई।
इसके बाद तेजिंद्र पाल और फिर विक्रांत बख्शी की सजा का एलान किया गया। सजा सुनकर तीनों के चेहर पीले पड़ गए। चेहरों पर खौफ झलकता रहा। अदालत में मौजूद सभी की नजरें उस समय जज और हत्यारों पर टिकी रहीं।