आईजीएमसी में टेस्ट शुरू होने से मरीजों को राहत
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हिमाचल प्रदेश सरकार और क्रस्ना लैब के बीच दो दिन से बना गतिरोध आखिरकार शुक्रवार को खत्म हो गया। कंपनी और सरकारी अधिकारियों की बीच हुई बैठक के बाद क्रस्ना लैब के कर्मचारी काम पर लौट आए हैं। दोपहर बाद इन कर्मचारियों ने निजी लैब में मरीजों के टेस्ट करने शुरू कर दिए। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने निजी लैब कर्मचारियों के दस्तावेज पूरी करने की बात कही है। इसके बाद ही पैसा जारी किया जाएगा। हालांकि, इससे पहले निजी लैब की ओर से टेस्ट की जांच और एक्सरे बंद किए जाने के बाद प्रदेश सरकार ने सरकारी लैब में दिनरात टेस्ट करने की व्यवस्था सुचारु कर दी थी। रोटेशन में लैब टेक्नीशियन को सेवाएं देने के आदेश जारी किए गए थे। इसी बीच निजी लैब ने काम करने की हामी भर दी।
यह है मामला
क्रस्ना लैब की बीते 9 महीने की 54 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। पैसा जारी न होने से टेस्ट की जांच के लिए केमिकल और अन्य सामग्री खरीदने के लिए बजट नहीं है। ऐसे में उन्होंने काम करना बंद कर दिया। हालांकि कंपनी का दावा है कि तीन बार सरकार को इस बारे में रिमाइंडर भी भेजे गए, लेकिन पैसा जारी नहीं किया गया।
क्रस्ना लैब के कर्मचारियों ने काम पर लौटने की हामी भरी है। शुक्रवार दोपहर बाद से प्रदेश के सभी मेडिकल काॅलेजों, अस्पतालों में निजी लैब में टेस्ट शुरू हो गए हैं। अस्पतालों की सरकारी लैब में भी मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं। मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी है। प्रतिदिन अस्पताल प्रबंधन से अपडेट लिया गया।
-एम सुधा देवी, स्वास्थ्य सचिव