फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रीणी के घर में बेटी नमिता ने संजोकर रखी है अटल की हर चीज

Sat, 18 Aug 2018 11:38 AM IST
मनु शर्मा, अमर उजाला, मनाली (कुल्लू)
विज्ञापन
विज्ञापन

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भले ही स्वास्थ्य ठीक न होने के चलते पिछले 12 साल से मनाली के प्रीणी में अपने दूसरे घर नहीं आए थे, पर उनकी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्या ने उनकी हर चीज को यहां बड़े ही प्यार से संजोकर रखा है।

विज्ञापन


उनके कमरे के एक टेबल पर उनका लिखा कविता संग्रह, अन्य किताबें और चश्मा रखा हुआ है। केयर टेकर हर रोज उनके बिस्तर और अन्य चीजों की साफ-सफाई करता है। बेटी नमिता साल में एक-दो बार जब मनाली आतीं तो उनके कपड़ों को धुलवाने के बाद इस्त्री करवा फिर अलमारी में रखवा देतीं।

उनके धोती और कुर्ताें से अलमारी भरी पड़ी है। उनका घर एक संग्रहालय की तरह है जो उनकी यादें संजोए है। घर में केयर टेकर और मंदिर के पुजारी के अलावा किसी को जाने की इजाजत नहीं है। 

विज्ञापन

करीब 25 साल से उनके घर की देख-रेख कर रहे सुखराम राठौर ने बताया कि बेटी नमिता और दामाद रंजन भट्टाचार्य अटल को प्यार से ‘बाप जी’ बुलाते थे।

‘बाप जी’ कहते ही उनके चेहरे पर मुस्कराहट छा जाती

उनकी देखादेखी में मैं भी उन्हें ऐसे ही पुकारता था। ‘बाप जी’ कहते ही उनके चेहरे पर मुस्कराहट छा जाती थी। सुखराम ने कहा कि जब भी मुझे कोई समस्या होती, मेरे चेहरे पर शिकन देख मुझसे पूछते थे कि क्या बात है।

किसी न किसी बहाने से कभी पैसे तो कभी उपहार मुझे या मेरे परिवार के सदस्यों को देकर मदद कर देते थे। आसपास के लोगों का हाल भी मुझसे पूछते रहते थे। उनके निधन से ऐसा लग रहा है जैसे मेरे सिर से पिता का साया उठ गया हो।

सुखराम ने बताया कि दीदी नमिता और उनके परिवार ने बताया था कि वे 15 जून को प्रीणी आएंगे, लेकिन 11 जून को ही अटल की तबीयत और ज्यादा खराब होने के कारण वे नहीं आ सके थे। 
विज्ञापन

दूसरे दिन एक समय खाना तो बना, पर हलक से नहीं उतरा निवाला

 अटल के गांव प्रीणी में दूसरे दिन भले ही ग्रामीणों ने चूल्हा जलाया और एक समय का खाना बनाया, लेकिन ग्रामीणों के हलक से एक निवाला नहीं उतरा। शुक्रवार को प्रीणी में दिनभर सन्नाटा छाया रहा।

जनप्रतिनिधियों और लोगों ने मेला ग्राउंड में 12 साल पहले उनके लगाए देवदार के पेड़ के पास एकत्रित होकर रोते-बिलखते उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही पेड़ की देखभाल करने का संकल्प लिया। अटल के निधन के चलते शाउणी मेला भी नहीं मनाने का निर्णय लिया गया। 

गांव की 70 वर्षीय हिमी देवी और 80 वर्षीय तेजी देवी ने कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे घर का मुखिया हमें छोड़ कर चला गया है। पूर्व प्रधानमंत्री जब भी गांव आते थे तो कुल्लवी धाम चखना नहीं भूलते थे।

प्रीणी महिला मंडल की प्रधान मणी देवी, उपप्रधान गोदावरी, निर्मला देवी, अंजु देवी, देई, खिमी देवी, आमरा देवी ने कहा कि भगवान ने उनका मार्गदर्शक छीन लिया है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें