इसके लिए दस दिनों तक जीरो डिग्री तापमान में फलों का शीत उपचार करना जरूरी होगा। यही प्रक्रिया नीदरलैंड से आने वाले फलों पर भी लागू होगी।
इटली से फूलों के बल्ब के आयात पर ऐसी ही पाबंदी लगाई गई है। यह पाबंदी रेनुनकुलस फूलों के टिश्यू कल्चर पौधों के आयात पर लगी है।
इनके साथ इंपैशेन्स नेक्रोटिक स्पेस वायरस के आने की आशंका है। तीनों देशों से आयात की जा रही सामग्री पर साफ-साफ कह दिया गया है कि वे इन कीटों और वायरस से मुक्त होने के फाइटोसेनिटरी प्रमाणपत्र दें। उसके बाद ही सामग्री भारत के लिए आयात हो।
बागवानी विशेषज्ञ डा. एसपी भारद्वाज का कहना है कि हम सौभाग्यशाली हैं कि अभी तक यह मक्खी हमारे यहां नहीं है। यह बहुत खतरनाक प्रजाति है। यह कई फलों में है, मगर अभी सेब में नहीं आई है।
यह आ गई तो यह सेब, नाशपाती सबको प्रभावित करेगी। नेटल या मेडिटेरेनियन फ्रूट फ्लाई सेरेटिटिस रोजा अफ्रीकी मूल की फ्रू ट फ्लाई है। इसके वयस्क चार से सात मिलीमीटर लंबे होते हैं।
इनके झुके हुए पंख होते हैं। इनमें पीले और काले पैट्रन होते हैं। इसकी 100 से भी अधिक प्रजातियां हैं। यह फलों को नुकसान पहुंचाने वाले खतरनाक कीटों में से एक है। ये पत्तियोें को भी खा जाते हैं। ये फलों की चमड़ी के नीचे अंडे देती हैं।