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Shimla News: फिर मेला दिल दुखा गया मौसम... से बटोरी वाहवाही

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पद्मभूषण पंडित साजन मिश्रा और पद्मश्री डॉ. यश गुलाटी ने जमाई महफिल
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गेयटी में जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां का आगाज, देश भर के जाने माने साहित्यकार और कवि ले रहे भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में रविवार से जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां विरासत-2024 शुरू हुआ। भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव आईएएस प्रबोध सक्सेना ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
दो दिवसीय कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन, गजल, पैनल चर्चा, कवि सम्मेलन, नाटक, दास्तानगोई, कवि सम्मेलन, कव्वाली, शास्त्रीय नृत्य, सूफी और लोक गायन सहित कई प्रस्तुतियां शामिल हैं। इसमें कई जाने-माने साहित्यकार और कवि भाग ले रहे हैं।
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रविवार को दोपहर दो बजे सबसे पहले सुर साधना कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई, जिसमें पद्मभूषण पंडित साजन मिश्रा, स्वरांश मिश्रा और प्रसिद्ध हारमोनियम वादक पंडित धर्मनाथ मिश्रा ने प्रस्तुति दी। इन्होंने राग मुल्तानी में तीन बंदिशें सुनाईं। इसमें गुरु नानक देव जी की साधे रचना राम बनाइए मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। वहीं पद्मश्री डॉ. यश गुलाटी ने सैक्सोफोन वादन की प्रस्तुति दी। इसकी शुरुआत ऐ मालिक तेरे वंदे हम संगीत के साथ की। इसके अलावा इस सत्र में उपन्यासकार महेंद्र भीष्म, भारती, नीलाक्षी राय, दानिश इकबाल, डॉ. ओम निश्चल, महेंद्र अजनबी, वेदप्रकाश वेद, अमन अक्षर, अभिषेक तिवारी और रामायण धर ने भी प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में शाम-ए-कव्वाली मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। इसमें नवाज साबरी ने अपने समूह के साथ मिलकर कव्वालियों के माध्यम से चार चांद लगा दिए। नवाज साबरी ने फिर मेला दिल दुखा गया मौसम..., दमा-दम मस्त कलंदर..., तू हीं तू हीं... से महफिल सजा दी।
दो दिवसीय इस कार्यक्रम में दूसरे दिन सोमवार को सत्र की शुरुआत पैनल चर्चा के साथ होगी। इसमें कई कवि और साहित्यकार भाग लेंगे। इसके बाद अपनी कहानी के अपने किरदार कार्यक्रम के दौरान मशहूर अभिनेता और लेखक मनु ऋषि चड्ढा अपनी आवाज में कहानी वाचन करेंगे। इसके बाद अभिनेता जमील खान, फैजल मलिक और मनु ऋषि चड्ढा के साथ जश्न-ए-अदब के संस्थापक कुंवर रंजीत चौहान विशेष चर्चा करेंगे। समापन समारोह के बाद दिलकश सुखन बहार मुशायरा का आयोजन होगा, जिसमें प्रमुख कवि और शायर शामिल होंगे।
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कार्यक्रम के संस्थापक कुंवर रंजीत चौहान ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति और साहित्य को प्रोत्साहित करना और युवा पीढ़ी को इसके महत्व से अवगत कराना है। इस अवसर पर जश्न-ए-अदब कल्चरल कारवां के निदेशक नवनीत सोनी भी मौजूद रहे।
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