न्यायालय के जारी आदेशों के बावजूद हिमाचल मानवाधिकार आयोग व लोकायुक्त, लोकपाल व मानवाधिकार कोर्ट के गठन न होने पर हिमाचल हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर मुख्य सचिव को हाजिर रहने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी और न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने प्रार्थी नमिता मणिकटला द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के बाद पारित किए।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई के बाद राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वह लोकायुक्त व मानवाधिकार आयोग के गठन बाबत जल्द उपयुक्त कदम उठाए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि प्रदेश सरकार का इस मामले में निराशाजनक रवैया रहा है जबकि मानवाधिकार समाज का अहम पहलू है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि हिमाचल में पिछले 15 सालों से मानवाधिकार आयोग का गठन नहीं हुआ है।
जबकि पिछले 15 सालों में तीन बार सरकारी बदल चुकी है जिससे लोगों के अधिकारों का हनन होने की स्थिति में उनको तुरंत न्याय दिलवाने के लिए कोई उपयुक्त फोरम नहीं है। याचिका में ऐसे कई उदाहरण दिए गए हैं कि मानवाधिकार आयोग का गठन न होने पर लोगों को गुहार लगाने के लिए अदालतों का सहारा लेना पड़ा। इसी तरह राज्य सरकार की ओर से लोकायुक्त का भी गठन नहीं किया गया है। जिस कारण लोकायुक्त के अधीन आने वाले मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। मामले की आगामी सुनवाई 12 मार्च में निर्धारित की गई है।