क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर ठगी करने वाले मुख्य आरोपी सुभाष, हेमराज और सुखदेव की संपत्तियों को सीज करने की तैयारी चल रही है। आरोपियों के नाम पर कहां-कहां कितनी संपत्ति है, पुलिस इसकी डिटेल एकत्रित कर रही है। संपत्ति की पूरी जानकारी हासिल करने के बाद सीज के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रदेश पुलिस की एसआईटी की जांच में पता चला कि आरोपियों ने लोगों का पैसा प्रॉपर्टी बनाने में इस्तेमाल किया है। बैंक खातों की पासबुक और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद यह भी पता चला है कि इनके खाते में अधिक पैसा नहीं है। ठगी कर इकट्ठे किए पैसे से आरोपी प्रापर्टी खरीदते रहे। पुलिस की एसआईटी की ओर से मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों का राजस्व रिकाॅर्ड भी खंगाला जा रहा है।
पुलिस ने लोगों को आगाह करने के लिए बार-बार एडवाइजरी भी जारी की, लेकिन आरोपियों के झांसे में फंसते गए। अब तक की जांच में पाया गया है कि आरोपियों पर 400 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। डीआईजी अभिषेक दुल्लर ने बताया कि पुलिस मुख्य आरोपी समेत आरोपियों की संपत्ति की डिटेल एकत्र कर रही है। उसके बाद संपत्ति सीज करने की प्रक्रिया शुरू होगी। करोड़ों रुपये की ठगी का यह मामला मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में गूंजा। इसके बाद ही उपमुख्यमंत्री ने एसआईटी गठित करने की बात कही थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा और कार्रवाई अमल में लाई।
एक हजार करोड़ तक की ठगी का अंदेशा
पुलिस को अंदेशा है कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर ठगी एक हजार करोड़ रुपये तक की हो सकती है। ठगी बीते तीन सालों से हो रही है। लोगों का विश्वास हासिल के लिए शुरुआती दौर में निवेशकों को पैसा भी दिया गया है। वर्ष 2021-22 में जब लोगों को पैसा नहीं मिला तो पुलिस को शिकायतें की गईं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी आरोपियों पर नजरें थीं। ऐसे में पुलिस इस मामले की जांच करने जुट गई।