प्रदेश में खराब मौसम से सेब की बंपर पैदावार की उम्मीद टूट रही है। कहीं बारिश, तूफान तो कहीं ओलावृष्टि से बागवानों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। निचले क्षेत्रों के सेब बहुल क्षेत्रों में अंधड़ और ऊपरी इलाकों में बर्फबारी से तापमान में आई गिरावट से फसल प्रभावित होने के आसार बन रहे हैं।
मौसम के बिगड़ते मिजाज से प्रदेश में चार हजार करोड़ के प्रत्यक्ष और परोक्ष सेब के कारोबार पर असर पड़ सकता है। हाल ही में गिरे ओलों से रामपुर के ऊंचे इलाकों में फ्लावरिंग स्टेज पर ही सेब फसल तबाह हो चुकी है। ओलों से सेब के फूल सहित बीमे पेड़ों से उखाड़कर जमीन पर गिर गए हैं।
ऐसे में बागवान 2-3 साल तक फसल की पैदावार पर संकट का दावा कर रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञ के अनुसार फ्लावरिंग स्टेज पर सेब पौधों को औसतन 18 से 24 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।
इससे सेब के फूलों की सेटिंग अच्छी होती है, लेकिन इस समय तापमान में गिरावट से सेब की बंपर फसल होने की उम्मीद टूट रही है। निचले क्षेत्रों में आंधी-तूफान से फसल को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया है।
सर्दियों में भारी हिमपात से इस वर्ष बागवानों को बंपर सेब की पैदावार की उम्मीद थी। भारी बर्फबारी से सेब के लिए जरूरी 1400 चिलिंग ऑवर्स भी पूरे हुए थे। अब मौसम खराब होने से बागवानों की उम्मीदों को झटका लगा है।
बागवानी विभाग के एसएमएस केएल कटोच के अनुसार जिन इलाकों में फ्लावरिंग और सेटिंग चल रही है, वहां बारिश से नुकसान पहुंच सकता है। अधिकतर इलाकों में सेब की सेटिंग हो चुकी है। इस पर बारिश का कोई असर नहीं पड़ने वाला। यदि ओलावृष्टि होती है तो सेब की फसल पर विपरीत असर पड़ सकता है।