250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले का रिकॉर्ड जुटाने के निदेशालय को मास्क और ग्लव्स की जरूरत पड़ गई है। निदेशालय में पड़ी फाइलों पर से सालों से धूल हटी ही नहीं है। सीबीआई ने घोटाले से संबंधित कुछ रिकॉर्ड मांगा है।
इसे निकालने के लिए इन फाइलों को खंगालना पड़ेगा। हालात ये हैं कि फाइलों पर धूल की मोटी परत जम गई है। एक फाइल को उठाते धूल ही धूल ही उड़ रही है। कर्मचारियों की सेहत का ख्याल रखने के लिए निदेशालय ने मास्क और ग्लव्स मंगवा लिए हैं। रिकॉर्ड एकत्र करने वाले कर्मचारियों को ये दिए गए हैं।
ऑनलाइन डाटा से मिलान के लिए जांच एजेंसी सीबीआई ने शिक्षा निदेशालय से आवेदनों के दस्तावेज मांगे हैं। इन दिनों छात्रवृत्ति शाखा के कर्मचारी स्टोर में रखे दस्तावेजों को खंगालने में जुटे हुए हैं। साल 2013 से 2017 तक जारी हुई छात्रवृत्ति राशि शक के घेरे में है।
कई निजी शिक्षण संस्थानों पर फर्जी एडमिशन दिखाकर सरकारी धनराशि को हड़पने का आरोप है। मामले की जांच कर रही सीबीआई ने साल 2013 से 2017 तक शिक्षा विभाग के ई पास पोर्टल से हुए आवेदनों का रिकार्ड हैदराबाद से एकत्र कर लिया है।
अब इस रिकार्ड का मिलान आवेदनों की हार्ड कॉपी से किया जाना है। बीते दिनों ही सीबीआई ने उच्च शिक्षा निदेशालय को साल 2013 से 2017 तक निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए आवेदनों की हार्ड कॉपी देने को कहा है।
जब निदेशालय के कर्मी स्टोर में पुराने आवेदनों को तलाशने में लगे तो फाइलों पर जमी धूल से उनका सामना हुआ। पुराने दस्तावेजों पर जमी धूल को हटाने के लिए अब निदेशालय ने मास्क और ग्लव्स की खरीद करने का फैसला लिया है।