फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फोन टैपिंग केस: आईएएस के बाद अब आईपीएस की बारी

Fri, 11 Apr 2014 08:11 PM IST
बयूरो/ अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
एचपीसीए केस में चार आईएएस अफसरों को जांच के दायरे में लेने के बाद अब कुछ आईपीएस अफसरों पर शिकंजा कसने वाला है।
विज्ञापन


विजिलेंस ने बहुचर्चित फोन टैपिंग केस में जांच पूरी कर ली है। इस केस की एफआईआर 26 जून 2013 को दर्ज हुई थी, जिसमें किसी का नाम नहीं था।

सूत्र बता रहे हैं कि पूर्व डीजीपी डा. डीएस मन्हास और आईडी भंडारी का नाम चार्जशीट में आ सकता है। मन्हास रिटायर हो चुके हैं, जबकि भंडारी भी इसी महीने रिटायर हो रहे हैं।
Trending Videos

पूर्व डीजीपी को बनाया जाएगा गवाह

उनके अलावा इंस्पेक्टर या इससे निचले रैंक के दो पुलिस जवानों और मोबाइल कंपनियों के नोडल अधिकारियों को भी चार्जशीट में शामिल किया जाएगा।

गृह विभाग के प्रधान सचिव पीसी धीमान का नाम इसमें आएगा या नहीं? यह अभी तय नहीं है। पूर्व डीजीपी बी. कमल कुमार को गवाह के तौर पर शामिल किया जा रहा है।

इस केस में अब तक कुल 35 लोगों से विजिलेंस पूछताछ कर चुकी है। आईजी अरविंद शारदा ने बताया कि मामले की जांच अंतिम चरण में है। इसमें कितने आरोपी बनेंगे, ये ड्राफ्ट चार्जशीट से पता चलेगा।
विज्ञापन

पूर्व सरकार पर है आरोप

इस केस में पूर्व भाजपा सरकार अवैध फोन टैपिंग करवाने के आरोप हैं। 24 दिसंबर 2012 को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के शपथ लेने की पिछली रात को सरकार ने सीआईडी के टेकिभनकल सेल से कंप्यूटर और अन्य रिकार्ड जब्त किया था।

इसे जुन्गा फोरेंसिक लैब भेजा गया। लैब ने रिपोर्ट दी कि कंप्यूटर हार्ड डिस्क, सीडी और पैन ड्राइव फोन टैपिंग की रिकार्डिंग है।

सरकार ने दावा किया था कि गृह विभाग की फाइलों से इस डाटा को जब मिलाया गया तो कई मोबाइल नंबर ऐसे पाए गए, जिन्हें टैप करने की मंजूरी नहीं दी गई थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें