आज के दौर में इंसान इतना अंधा हो गया है कि अपनों के खून से ही हाथ रंग रहा है। मर्यादाओं को तोड़ा जा रहा है। दरिंदगी की हदें पार की जा रही हैं। बेरहम बाप ने पहले पत्नी, बेटी और पांच साल के बेटे को जूस में जहर मिलाकर पिला दिया और बाद में खुद भी जहर निगल लिया। पांच साल के बेटे की हालत स्थिर है।
आखिर इनका क्या कसूर था। पत्नी पर शक की वजह से उसे मौत के घाट के उतार दिया। इंसान इस हद तक बर्बरता पर उतर आया है कि वह अपनों की ही जान का दुश्मन बन गया है। इसके लिए हम किसे जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। शायद हम खुद ही इसके जिम्मेदार हैं।
संयम नाम का शब्द तो जिंदगी से गायब हो रहा है। कठिन परिस्थितयों में इंसान संयम खो बैठता है और इसी वजह से दरिंदगी पर उतर आता है। रिश्तों में सामजस्य स्थापित करना होगा, ताकि आने वाली पीढिय़ां नफरत की इस आग में झुलसने से बच सके और भाईचारा बना रहे और एक नए युग का सूत्रपात हो सके।