फर्जी डिग्री मामले के बाद मानव भारती विवि के लगभग चार हजार विद्यार्थियों की डिग्रियां लटक गई हैं। युनिवर्सिटी का तमाम रिकॉर्ड पुलिस के कब्जे में होने से यह दिक्कत पेश आ रही है। रिकॉर्ड में पूर्व और वर्तमान समय में विवि से पढ़ाई कर रहे करीब 4000 विद्यार्थी शामिल हैं। रिकॉर्ड न मिलने से विद्यार्थियों के दस्तावेजों की पहचान नहीं हो पा रही है। हालांकि विद्यार्थियों से संबंधित दस्तावेजों को बहाल करने के लिए वर्तमान विवि प्रबंधन कोर्ट में याचिका भी लगा चुका है। जिसमें कोर्ट ने विद्यार्थियों के दस्तावेज को लेकर मंजूरी दी है। वहीं अब प्रबंधन ने विद्यार्थियों के दस्तावेजों को बहाल करने के लिए एसआईटी को पत्र भेजा है।
जिसे 15 जनवरी तक मंजूरी मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 से 19 तक शिक्षा ग्रहण कर रहे पुराने विद्यार्थियों के दस्तावेज बहाल न होने के कारण वे परेशानी में हैं। दस्तावेजों की पहचान न होने के कारण विद्यार्थियों को उनकी डिग्री सहित मार्क्सशीट भी नहीं मिल रही है। जिसके चलते विद्यार्थी नौकरी सहित अन्य कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं। मानव विवि में फर्जी डिग्री का खुलासा होने के बाद पुलिस ने विवि सहित विद्यार्थियों संबंधित सभी रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए थे। इसमें वर्ष 2009 से 2019 तक रिकॉर्ड शामिल है। वहीं वर्तमान में शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को भी अपने भविष्य की चिंता सताने लग गई है।
15 जनवरी तक रिकार्ड मिलने की उम्मीद : राजीव
मानव भारती विवि के प्रशासक राजीव कुमार ने बताया कि विद्यार्थियों की पहचान करने के लिए उनके पास रिकॉर्ड ही नहीं है। जिस कारण डिग्री, मार्क्सशीट विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रही हैं। इसके लिए कोर्ट में भी याचिका दर्ज करवाई गई थी। जिसके बाद नौ दिसंबर को कोर्ट से विद्यार्थियों के दस्तावेज देने की बात कही गई है। जिसके लिए मामले की जांच कर पुलिस की एसआईटी को भी पत्र भेजा गया है। 15 जनवरी तक मिलने की उम्मीद है।
विद्यार्थियों को मिल रहे झूठे आश्वासन
मानव भारती स्टूडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमन आनंद, सचिव प्रिया कांबोज, उपाध्यक्ष कशिश धवन, मंदीप गोयल, राजकुमार, अमरिक सिंह ने कहा कि डिग्री और मार्क्सशीट के लिए प्रशासन सिर्फ झूठे आश्वासन ही दे रहा है। 2019 से पास होने के बाद अभी तक डिग्री और मार्क्सशीट न मिलने के कारण वे अगली पढ़ाई सहित अपना कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं।