नवबहार में अवैध निर्माण करने के मामले में घिरे हिमाचल के पूर्व पुलिस महा निदेशक (डीजीपी) डीएस मन्हास का एक गवाह शनिवार को आयुक्त कोर्ट में गवाही देने से मुकर गया।
मन्हास ने दो गवाहों के बयान दर्ज करवाने के लिए आयुक्त अमरजीत सिंह के कोर्ट में आवेदन किया था। शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान एक गवाह ने बयान देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने दूसरे गवाह के बयान दर्ज कर लिए हैं। अब 28 अप्रैल को गवाह के बयान पर बहस होगी। पूर्व डीजीपी के भवन निर्माण का मामला बीते साल अक्तूबर माह से सुर्खियों में है। नगर निगम और जिला प्रशासन ने अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच की है।
दोनों जांच रिपोर्ट के बनने के बाद नगर निगम आयुक्त के कोर्ट में मामला दर्ज हुआ है। पहली मार्च को हुई सुनवाई में पहली बार पूर्व डीजीपी स्वयं कोर्ट में हाजिर हुए थे। आरोप है कि पूर्व डीजीपी ने स्वीकृत नक्शे के बाहर भवन का निर्माण किया है।
मंगलवार को सहायक आयुक्त कोर्ट में पेशी
पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास के खिलाफ नगर निगम के सहायक आयुक्त के कोर्ट में भी मामला चल रहा है। इस मामले में सरकारी अफसर गवाह बनाए गए हैं। 22 अप्रैल को यह अफसर नगर निगम के सहायक आयुक्त कोर्ट में गवाही देंगे।
नौ अप्रैल को पूर्व डीजीपी की ओर से निगम की पैमाइश पर जवाब दे दिया गया है। मार्च माह में नगर निगम ने डीएस मन्हास को भवन के पैमाइश की रिपोर्ट सौंपी थी। पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास के भवन की राजस्व विभाग की टीम ने पैमाइश की है।
तहसीलदार शिमला शहरी की अगुवाई में गई टीम ने फीते से जमीन नापी है। निगम के मुताबिक पूर्व डीजीपी ने 959 वर्ग मीटर की बाउंड्री वॉल नगर निगम की भूमि पर बनाई है।
पब्लिक प्रीमिसिस एक्ट 1971 एक्ट में पूर्व डीजीपी पर कार्रवाई की जा रही है। 12 मार्च को सहायक आयुक्त के कोर्ट में पूर्व डीजीपी के गवाह पेश हुए थे। अब 22 अप्रैल को सरकारी गवाहों की पेशी होगी।