हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष व भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ धर्मशाला कोर्ट में चौथा चालान पेश हो गया है। ये चालान धर्मशाला स्टेडियम में सरकारी भूमि पर जबरन कब्जा करने के आरोप में दर्ज एफआईआर में दायर हुआ है।
विजिलेंस की सिफारिश पर 8 अप्रैल 2014 को धर्मशाला पुलिस ने 14/13 नंबर के तहत ये एफआईआर दर्ज की थी। धर्मशाला स्टेडियम की पैमाइश के बाद आरोप था कि एचपीसीए ने जितनी जमीन सरकार ने लीज पर दी, उससे 2303 वर्ग मीटर ज्यादा पर कब्जा कर लिया।
विजिलेंस ने इस कारण धर्मशाला पुलिस से एफआईआर की सिफारिश की थी, क्योंकि विजिलेंस का दायरा भ्रष्टाचार निरोधक कानून तक ही है। जबकि आईपीसी की धारा 447 के तहत अतिक्रमण यानी ट्रैसपासिंग का केस दर्ज होता है।
केस में कई रोचक तथ्य
लोअर डिवीजन सीजेएम कोर्ट धर्मशाला में दायर चार्जशीट में सांसद अनुराग ठाकुर और एचपीसीए पदाधिकारी विशाल मरवाह को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, इससे पहले विजिलेंस क्रिकेट स्टेडियम के पास 720 वर्ग मीटर शिक्षा विभाग की भूमि को भवन गिराकर कब्जाने का केस अलग से दर्ज कर उसकी भी जांच कर रही है।
धारा 447 के तहत तीन महीने की सजा का प्रावधान तो है, लेकिन इसमें एक प्रावधान ये भी है कि अतिक्रमण का केस 6 महीने से पुराना नहीं होना चाहिए। जबकि पुलिस ने इस केस में 2008 के अतिक्रमण पर 2014 में केस दर्ज किया है।
इस केस में एक और रोचक तथ्य ये भी है कि तहसीलदार ने अपनी अन्य डिमार्केशन रिपोर्ट में ये कहा है कि एचपीसीए के पास स्टेडियम में 45 हजार वर्ग मीटर भूमि है, जबकि एचपीसीए को सरकार ने लीज पर 49118 वर्ग मीटर जमीन दी हुई है। यानी इस एफआईआर में लगी डिमार्केशन रिपोर्ट और तहसीलदार की दूसरी रिपोर्ट के तथ्य विरोधाभासी हैं।