लोकसभा चुनाव के नतीजे सामने आने से पहले ही हिमाचल की कांग्रेस सरकार में राजनीतिक बवंडर खड़ा हो गया है। घुमारवीं के कांग्रेस विधायक राजेश धर्माणी ने मुख्य संसदीय सचिव पद से फिर इस्तीफा दे दिया है।
धर्माणी ने शनिवार को इस पद से त्यागपत्र दिया। धर्माणी ने सीपीएस की कुर्सी को असंवैधानिक और बिना किसी मतलब की कहा है।
घुमारवीं से लगातार दूसरी बार विधायक बनने वाले युवा कांग्रेस नेता धर्माणी ने शनिवार को कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पास संदेशवाहक को भेजकर शनिवार को अपना इस्तीफा थमा दिया है।
मुश्किल में पड़ सकती है वीरभद्र सरकार
धर्माणी मुख्य संसदीय सचिव (वन) भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीपीएस पद का उनके लिए कोई मतलब नहीं है। उन्हें पद तो दिया गया है लेकिन कोई शक्तियां नहीं मिली।
सिर्फ कार्यालय, स्टाफ और गाड़ी मिलती है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले धर्माणी के इस फैसले से प्रदेश सरकार मुश्किल में पड़ सकती है।
इससे सरकार फिर सवालों के घेरे में है। साथ ही पार्टी के अंदर की फूट एक बार फिर बाहर आ गई है। पार्टी के नेता आलाकमान के फैसलों से कितना खुश है, इसके नतीजे अब सामने आने लगे हैं।
पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं धर्माणी
यूं तो राजेश धर्माणी ने यह पद दो अक्तूबर 2013 को ही छोड़ दिया था। बाद में चार अक्तूबर को इस्तीफा इसलिए वापस ले लिया था कि आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर इससे कोई गलत संदेश नहीं जाए। इस बारे में सीएम से भी उनकी लंबी बात हुई थी।
धर्माणी बोले कि घुमारवीं की जनता से विचार-विमर्श के बाद ही उन्होंने यह इस्तीफा दिया है। हालांकि, इस्तीफे पर सरकार की ओर से निर्णय सोमवार को संभावित है।
धर्माणी ने फिर से इस्तीफा देने की पुष्टि की कि लोकसभा चुनावों की वजह से उन्होंने पहले अपने फैसले को डेफर कर दिया था। अब सही समय पर फिर से यह पद छोड़ दिया है।