सीपीआरआई कई साल तक कुफरी और फागू फार्म में आलू बीज की पैदावार करके किसानों को उपलब्ध कराता रहा है। इसके अलावा बीज का कुछ हिस्सा संस्थान अपने पास रखता था। आज की तारीख में इन दोनों फार्म में आलू बीज के अलावा वैकल्पिक फसलें उगाई जा रही हैं।
देश के किसानों को इस बार भी कुफरी और फागू आलू बीज की किस्में नहीं मिलेंगी। इसका कारण यह है कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला को आवेदन के बावजूद दोनों किस्मों के उत्पादन की इस बार भी मंजूरी नहीं दी है। मिट्टी में लगे निमेटोड (कृमि सूत्र) के कारण पिछले चार साल से केंद्र सरकार ने बीज की पैदावार करने पर रोक लगा रखी है। कृमि सूत्र लगातार आलू की फसल लेने के कारण पनपता है।
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पैदावार न होने से किसानों को जरूरत का आलू बीज जुटाने में संकट खड़ा हो रखा है। बताते हैं कि सीपीआरआई कई साल तक कुफरी और फागू फार्म में आलू बीज की पैदावार करके किसानों को उपलब्ध कराता रहा है। इसके अलावा बीज का कुछ हिस्सा संस्थान अपने पास रखता था। आज की तारीख में इन दोनों फार्म में आलू बीज के अलावा वैकल्पिक फसलें उगाई जा रही हैं। इससे संस्थान को वित्तीय घाटा भी उठाना पड़ रहा है। राज्य में निजी कंपनियां कांटेक्ट फार्मिंग के तहत प्रदेश के कई इलाकों में आलू का उत्पादन करा रही हैं और सीपीआरआई को स्वीकृति नहीं दी गई।
सीपीआरआई ने मंजूरी के लिए लिखित में उठाया केंद्र से मामला
सीपीआरआई के निदेशक डॉ. एनके पांडेय कहते हैं कि कुफरी और फागू फार्म में आलू बीज की पैदावार करने की मंजूरी के लिए केंद्र को पत्र भेजा गया है। इसके बाद रिमाइंडर भी भेजा है। कृषि भवन में अधिकारियों से बैठक होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह नहीं हो पाई।