केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) ने देश के किसानों की जरूरतों को देखते हुए आलु की तीन नई किस्में विकसित की हैं। इनमें एक विधायन और दो भोज्य किस्में हैं। इन किस्मों से अच्छी पैदावार ली जा सकती है। नई किस्मों पर पिछेता झुलसा रोग की भी ज्यादा मार नहीं पड़ेगी।
तीन नई किस्में ईजाद करने की पुष्टि करते हुए सीपीआरआई के निदेशक डॉ. एसके चक्रवर्ती ने बताया कि इनकी सबसे बड़ी खासियत बीमारी रोधक है। इस आलू की आकर्षक कंदें (टयूबर) तैयार होंगी। उत्पादन भी ज्यादा होगा। तीनों किस्मों में छह माह तक भंडारण क्षमता रहेगी। ये किस्में अभी केंद्र सरकार को जारी करनी हैं। इसके बाद ही इसे किसानों तक पहुंचाया जाएगा।
फ्रेंच फ्राई एमपी04-578
वैज्ञानिकों ने विधायन के मकसद से फ्रेंच फ्राई के लिए एमपी04-578 आलू की किस्म विकसित की है। इससे ज्यादा उपज हासिल कर सकते हैं। यह किस्म देश के उत्तर पश्चिमी और मैदानी इलाकों के किसान उगा सकेंगे। यह आलू की किस्म विधायन के लिए उपयोगी है और इसे खास तौर पर फ्रेंच फ्राई बनाए जा सकेंगे। आलू सफेद, आकर्षक और गुदा सफेद है। इस आलू पर पिछेता झुलसा रोग मार नहीं कर सकता। इसमें मीठा कम और शुष्क पदार्थ अधिक है। आलू की भंडारण क्षमता ज्यादा है।
मध्यावधि एसएम00-42
सीपीआरआई के वैज्ञानिकों ने आलू की यह किस्म पहाड़ी और पठारी क्षेत्रों के आलू उत्पादकों के लिए विकसित की है। इस आलू की किस्म सफेद, अंडाकार, समान कंदें और आंखें उथली हैं। आलू का गुदा क्रीम रंग का है और यह पिछेता झुलसा रोग रोधक है। आलू की यह किस्म अपेक्षाकृत ज्यादा दिनों तक भंडारण कर सकते हैं और यह आलू खाने में अच्छा है।
लाल आलू पीएस06-88
नब्बे दिन में तैयार होने वाली लाल आलू की यह नई किस्म मध्यम ऊंचाई के लिए विकसित की गई है, इससे 30 से 35 टन प्रति हेक्टेयर फसल ली जा सकेगी। नब्बे दिन में तैयार होने वाली यह आलू पूर्वी भारतीय मैदानी इलाकों के लिए लाभकारी है। जिन क्षेत्रों के लोग लाल आलू बिना छिलका निकाले भोजन में इस्तेमाल करते हैं, उन इलाकों के लिए इसे विकसित किया गया है। आलू का रंग गहरा लाल, मध्यम गहरी आंखें और आकर्षक कंदें हैं। इस किस्म के आलू को छह माह तक भंडारण कर सकते हैं।