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हिमाचल चुनावः माकपा ने भी जारी किया घोषणापत्र, जनता से किए ये वादे

Thu, 02 Nov 2017 06:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश के 14 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही और पांच सीटों पर अन्य प्रत्याशियों को समर्थन दे रही कम्यूनिस्ट पार्टी आफ इंडिया मार्क्सवादी ने भी अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। घोषणापत्र मजदूरों, बेरोजगारों, युवाओं और किसानों पर केंद्रित है।
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वीरवार को पार्टी के राज्य सचिव ओंकार शाद, टिकेंद्र पंवर, विजेंद्र मेहरा, जगतराम और बलवीर पराशर ने शिमला में पार्टी का घोषणापत्र जारी किया। माकपा नेताओं ने बताया कि हम स्वयं 14 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं जबकि  तीन सीटों पर सीपीआई और दो सीटों पर आजाद प्रत्याशियों को समर्थन दे रहे हैं।

ऐसे में माकपा प्रदेश की सत्ता में आने की बात नहीं कर रही है। पार्टी के राज्य सचिवालय के सदस्य और नगर निगम शिमला के पूर्व उपमहापौर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि हिमाचल विधानसभा में अभी तक सशक्त विपक्ष नहीं रहा है। भाजपा और कांग्रेस तो पांच-पांच साल का खेल खेलती आ रही हैं।
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दोनों दलों के नेताओं के बीच सामंजस्य बना हुआ है। ऐसे में माकपा एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए विधानसभा चुनावों में उतरी है। आम जनता की आवाज को विधानसभा में उठाकर सरकार को जनविरोधी फैसले लेने से रोका जाएगा।

मजदूर व कर्मचारी

मजदूर
- सभी स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित करना।
- मनरेगा और दैनिक भोगियों को श्रमिक कल्याण बोर्ड से जोड़ना व पंजीकरण करना।
- रोजगार को सामाजिक सुरक्षा में शामिल करना। सभी को पक्का रोजगार देना।
- सभी कर्मचारियों को ईपीएफ, ईएसआई, मेडिकल तथा पेंशन सुविधा से जोड़ना।

कर्मचारी
- कर्मचारियों को 4-9-14 टाइम स्केल देना।
- आवास भत्ते को मूल वेतन से 10 प्रतिशत के हिसाब से देना।
-  मई 2003 के बाद लगे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करना।
- करुणामूलक आधार पर नौकरियां देना।
- सभी विभागों में नियमित भर्तियां करना।
- हिमाचल परिवहन निगम को रोड़वेज बनाना।

कृषि एवं बागवानी

- सभी फसलों का बीमा करना।
- कृषि और बागवानी में सार्वजनिक निवेश बढ़ाना।
- सस्ता कृषि ऋण दिलवाना और सहकारिता को बढ़ावा देना।
- हेलनेट, कृषि व बागवानी उपकरणों पर 90 प्रतिशत उपदान देना।
- जंगली जानवरों से निजात दिलाने के लिए बंदरों का निर्यात करवाना और वैज्ञानिक कलिंग करना।

स्वास्थ्य
- सार्वजनिक निवेश को बढ़ाना। डॉक्टरों और स्टाफ  की कमी को पूरा करना।
- जीवन रक्षक दवाओं को मुफ्त में देना। रोगी कल्याण समिति, आउटसोर्स कर्मियों को नियमित करना।

‌शिक्षा
- रूसा को समाप्त करना।
- छात्र संघ के प्रत्यक्ष चुनाव करवाना।
- शिक्षकों व अन्य स्टाफ के पदों को भरना।
- ‌शिक्षा के निजीकरण को रोकना।
- कॉलेजों व विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि को वापस लेना।

महिला व खाद्य सुरक्षा

खाद्य सुरक्षा
- सभी परिवारों को प्रतिमाह 35 किलो राशन देना।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सार्वभौमिकरण करना।
- गैस सब्सिडी को दोबारा बहाल करना।

महिला
- शैक्षणिक, आर्थिक और कानूनी तौर पर मजबूत करना।
- महिला सुरक्षा को सख्ती से लागू करना।
- महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना।
- कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल सुविधा देना।

सामाजिक न्याय
- रोजगार में दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यकों को अवसरों में समानता।
- शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए नौकरियों में आरक्षण तथा खाली पदों को भरना।
- मानव अधिकार कमीशन का गठन करना।

व्यापारी और पर्यटन

व्यापारी
- अधिकारों को बचाने के लिए एक स्टेचुटरी बोर्ड का गठन करना।
- छोटे दुकानदारों को बिना ब्याज के लोन की व्यवस्था करना।
- दुकानों और व्यापारिक घरानों में कार्यरत कर्मियों के लिए जॉब सिक्योरिटी का प्रावधान करना।
- जीएसटी में व्यापारी विरोधी प्रावधानों को बदलना।

आधारभूत ढांचा
- प्रदेश में सड़कों, टनलों का निर्माण और रखरखाव करना।
- पीने के पानी और सिंचाई का उचित प्रबंध करना।
- रेलवे के विस्तार के लिए काम करना, केंद्र पर इसके लिए दबाव बनाना।

पर्यटन
- प्रदेश में उचित बुनियादी ढांचे का गठन करना।
- पर्यटन निगम को मजबूत करना। होम स्टे को बढ़ावा देना।
- नौजवानों को पर्यटन के तहत विशेष प्रशिक्षण देना।
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उद्योग और अर्थव्यवस्था

उद्योग
- कृषि बागवानी पर आधारित छोटे व मध्यम उद्योगों को बढ़ावा व प्रोत्साहन देना।
- केंद्र से औद्योगिक पैकेज दिलवाने के लिए संघर्ष करना।
- सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों को एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान कर उनको मजबूत करना।

अर्थव्यवस्था
- राज्य का विशेष दर्जा बहाल करने के लिए काम किया जाएगा।
- जंगलों की रक्षा के लिए 1,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष मुआवजा केंद्र से लेना।
- बिजली उत्पादन पर मिलने वाले डिस्ट्रेस कॉस्ट को बढ़ा कर 20 प्रतिशत करना, बिजली पर दस फीसदी रॉयल्टी प्रति यूनिट लेना।
- सीमेंट और दूसरा माल जो प्रदेश से बाहर जाता है उस पर सैस लगाना।
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