प्रदेश में शक्तिपीठ श्री नयनादेवी, ज्वालाजी सहित बगलामुखी व अन्य कई मंदिरों में जिन उत्पादों की आपूर्ति की जाती है, उनकी सामग्री का स्रोत 400 देसी गोवंश हैं। कविता ने बताया कि 200 देसी गोवंश कोठीपुरा में और इतनी ही संख्या में आईटीआई के पास रखे गए हैं।
गोवंश के गोबर को सुखाया जाता है जिसके बाद इसे मशीन में पीसा जाता है। इस गोबर का इस्तेमाल तेल, गुगल, लोबान, मोगरा और चंदन पाउडर बनाने में किया जाता है। कविता गुप्ता 25 देसी गिर गायों समेत सिंध की साहीवाल सहित अन्य प्रजातियों पर काम कर रही हैं। रोजाना 800 लीटर दूध का उत्पादन होता है।
राष्ट्रीय गोपाल रत्न अवार्ड से हो चुकीं सम्मानित
देसी गोवंश की सेवा के लिए उन्हें वर्ष 2018 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह से राष्ट्रीय गोपाल रत्न अवार्ड भी मिल चुका है। कविता को गोकुल मिशन के तहत विश्व दुग्ध दिवस के मौके पर राष्ट्रीय कृषि विज्ञान भवन दिल्ली में पहाड़ी व उत्तर पूर्व क्षेत्र के राष्ट्रीय गोपाल रत्न से सम्मान दिया गया था।