वीडियो चेट के दौरान बनाया था अश्लील वीडियो
आरोपी कर रहा था एक लाख रुपये की मांग, नहीं देने पर कर दिया वीडियो वायरल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सोशल मीडिया और डेटिंग एप के जरिए युवतियों को झांसे में लेकर उनकी निजता से खिलवाड़ करने और ब्लैकमेलिंग के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-2 शिमला यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री प्रसारित करना केवल पीड़िता की व्यक्तिगत गरिमा पर प्रहार नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के हित के भी खिलाफ है क्योंकि यह सामग्री इंटरनेट पर नाबालिग बच्चों तक भी पहुंच सकती है। मामला महिला पुलिस थाना बीसीएस में 12 जुलाई 2026 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। पीड़िता ने शिकायत में आरोप लगाया कि वर्ष 2025 में उसकी मुलाकात एक डेटिंग एप पर तमिलनाडु निवासी पूरा राम से हुई थी। बातचीत के दौरान आरोपी ने युवती को अपने विश्वास में लिया और वीडियो चेट के दौरान उसका आपत्तिजनक वीडियो स्क्रीन रिकॉर्डर के जरिए चुपके से रिकॉर्ड कर लिया।
पुलिस जांच रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद आरोपी ने युवती को सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया और उसे धमकाते हुए एक लाख रुपये की मांग की। पैसे न देने पर वीडियो इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी दी। इसके बाद आरोपी ने निजी वीडियो को टेलीग्राम और अन्य सोशल प्लेटफॉर्म पर वायरल कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि यह वीडियो कई वेबसाइटों और सोशल मीडिया आईडी तक पहुंच गया जहां से अन्य सह-आरोपी इसे ऑनलाइन बेचने का धंधा कर रहे थे। आरोपी ने दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया है और वह जांच में शामिल होने को तैयार है। अदालत ने दलील सुनने के बाद कहा कि मौजूद साक्ष्य आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हैं। साक्ष्य जुटाने के लिए आरोपी की कस्टोडियल इंटेरोगेशन आवश्यक है। सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।