मंडी निवासी को सुनाई सजा, जुर्माना अदा न करने पर तीन माह और काटना होगा साधारण कारावास
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने चेक बाउंस मामले में मंडी निवासी आरोपी को दोषी करार दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) कोर्ट नंबर-1 शिमला, प्रतिभा नेगी की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी को आठ माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर चेक राशि का दोगुना यानी 3,00,600 रुपये का मुआवजा भी लगाया है। मुआवजा अदा न करने की सूरत में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। यह राशि शिकायतकर्ता बैंक को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी। मामले के अनुसार, आईसीआईसीआई बैंक शाखा माल रोड, शिमला ने अधिकृत प्रतिनिधि अमित भारद्वाज के माध्यम से अदालत में शिकायत दायर की थी। बैंक का कहना था कि मंडी जिले के निवासी मोहम्मद सफी ने 19,19,000 लाख रुपये से अधिक का ऋण लिया था। बाद में ऋण खाते की देनदारी के निपटारे के लिए आरोपी ने 1,50,300 रुपये का एक चेक 26 जुलाई 2022 को बैंक के नाम जारी किया। शिकायतकर्ता बैंक ने जब चेक को भुगतान के लिए लगाया तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण 29 सितंबर 2022 को बाउंस हो गया। बैंक की ओर से कानूनी मांग नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपी ने 15 दिनों की तय समयसीमा में राशि का भुगतान नहीं किया जिसके बाद अदालत में शिकायत दायर की गई।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि चेक केवल सुरक्षा (सिक्योरिटी) के तौर पर दिया गया था और बैंक ने इसका दुरुपयोग किया है। वहीं, बैंक के अधिवक्ता ने दलील दी कि चेक पर आरोपी के हस्ताक्षर हैं और एनआई एक्ट की धारा 139 के तहत आरोपी चेक के कानूनी दायित्व को गलत साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद स्पष्ट किया कि खाली हस्ताक्षरित चेक देने पर भी धारा 20 के तहत प्राप्तकर्ता को उसे भरने का विधिक अधिकार प्राप्त होता है। इन्हीं सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया है।