तारादेवी में 93.970 ग्रामचिट्टे के साथ पकड़े थे आरोपी, सह आरोपियों को जमानत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में नशा तस्करी के मामले में गिरफ्तार हरियाणा के एक आरोपी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। शिमला की विशेष अदालत (स्पेशल जज-1) प्रवीण गर्ग की अदालत ने करीब 94 ग्राम चिट्टे के साथ पकड़े गए आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऐसे में उसे जमानत देने से गवाहों को प्रभावित या डराने-धमकाने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। मामले के अनुसार 19 मार्च 2026 की रात शिमला पुलिस की स्पेशल सेल की टीम तारादेवी और बालूगंज क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इस दौरान गुप्त सूचना मिली कि तारादेवी-टूटू बाईपास रोड पर एक कार में कुछ लोग भारी मात्रा में चिट्टे के साथ मौजूद हैं। पुलिस ने जब मौके पर खड़ी गाड़ी की तलाशी ली तो डैशबोर्ड से 93.970 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस ने गाड़ी में सवार पांचों आरोपियों अनजीत, इरफान, रविकांत, नरिंदर और मुकेश को हिरासत में ले लिया और बालूगंज थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 के तहत मामला दर्ज किया।
याचिकाकर्ता आरोपी रविकांत निवासी खांडा, तहसील खरखौंदा , जिला सोनीपत की ओर से दलील दी गई थी कि मामले में जांच पूरी होकर चालान पेश हो चुका है और इस केस के दो सह-आरोपियों इरफान और मुकेश को अदालत पहले ही जमानत दे चुकी है। इसलिए समानता के आधार पर उसे भी रिहा किया जाए। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड बेहद गंभीर है। रविकांत के खिलाफ हरियाणा के सोनीपत और रोहतक जिलों में आर्म्स एक्ट सहित आईपीसी की धारा 397 (डकैती या लूट के दौरान गंभीर चोट), 398 और 436 (आग लगाकर नुकसान पहुंचाना) जैसे गंभीर अपराधों के तहत करीब छह मामले दर्ज हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नशा तस्करी समाज और जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बरामद नशे की मात्रा मध्यवर्ती (इंटरमीडिएट) होना अपने आप में जमानत का कोई तय आधार नहीं हो सकता। सह-आरोपियों की तुलना में इस आरोपी के आपराधिक मामले कहीं अधिक गंभीर हैं, इसलिए उसे समानता का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने आरोपी के आपराधिक इतिहास और निष्पक्ष सुनवाई पर पड़ने वाले असर को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।