जान पर भारी पड़ रही कोरोना की दूसरी लहर ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में पर्यटन कारोबार को पटरी से उतार दिया है। कोरोना के खतरे और बंदिशों ने देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के कदम जकड़ लिए हैं। जिले के अधिकांश होटलों और होमस्टे में ऑक्यूपेंसी शून्य हो चुकी है। एडवांस बुकिंग भी धड़ाधड़ रद्द होने लगी है। परेशान पर्यटन कारोबारी फिर से अपना काम-धंधा समेटने लग पड़े हैं। लगातार दूसरे साल भी समर सीजन पिटने से कारोबारी चिंतित हैं।
जिले के पर्यटन स्थल तीर्थन वैली और जिभी घाटी में 100 से अधिक होटल व होमस्टे पर ताले लग चुके हैं। कामकाज बुरी तरह से प्रभावित होता देख होटल व होमस्टे संचालकों ने स्टाफ को घर भेज दिया है। जल्द ही पार्वती घाटी और पर्यटन नगरी मनाली के होटलों व होमस्टे इकाइयों में भी ताले लटक जाने की आशंका है। कुल्लू जिले में 15 अप्रैल से समर सीजन शुरू हो चुका है। लेकिन, मनाली समेत पार्वती, तीर्थन और जिभी वैली में इक्का-दुक्का सैलानी ही नजर आ रहे हैं। होटलों और होमस्टे के कमरे खाली चल रहे हैं।
जबकि, इस समय पूरी कुल्लू घाटी सैलानियों की भीड़ से भरी रहती थी। जिभी वैली टूरिज्म डेवलपमेंट एसोसिएशन के प्रधान ललित कुमार ने कहा कि जिभी, सोझा, घियागी और गाड़ागुशैणी में चल रहे होटल एवं होमस्टे में सन्नाटा पसरा है। पिछले एक सप्ताह से ऑक्यूपेंसी जीरो चल रही है। 35 फीसदी व्यावसायिक संस्थानों को बंद करना पड़ा है। तीर्थन कंजरवेशन एंड टूरिज्म डेवलपमेंट के अध्यक्ष वरुण ने कहा कि घाटी में पर्यटकों की मूवमेंट शून्य है और ऐसे में 80 फीसदी होटल व होमस्टे बंद कर ताले लगा दिए हैं। एडवांस बुकिंग भी सौ फीसदी रद्द हो गई है। मई तक पूरी वैली के होटल-होमस्टे पर ताला लग जाएगा। (संवाद)
पिछले साल हुआ था एक हजार करोड़ का नुकसान
जिला कुल्लू में पर्यटन कारोबार लगातार दूसरे साल कोरोना की भेंट चढ़ गया है। पिछले साल कोरोना की मार से पर्यटन कारोबारियों को करीब एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा था। पर्यटन कारोबार से जुड़े तीन हजार व्यावसायिक प्रतिष्ठान सात से आठ महीने तक के लिए बंद रहे थे। इनसे जुड़े करीब 20 हजार लोगों का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार छिन गया था।