कोरोना वायरस की बढ़ती दहशत के बीच हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। लगातार बढ़ती विकट परिस्थितियों में उद्योग चौतरफा संकट में घिरता जा रहा है। कच्चे माल की कमी से फार्मा उद्योगों में उत्पादन लागत बढ़ गई है। तैयार माल निर्यात नहीं हो पा रहा है, साथ ही लगातार घटती मांग ने उद्योगों में उत्पादित माल की आपूर्ति भी प्रभावित कर दी है। तैयार और कच्चे माल को यहां से वहां लाने और ले जाने की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। इन हालातों में फार्मा उद्योग पर वित्तीय संकट के आसार भी बन गए हैं।
डिमांड हो गई कम
सीआईआई हिमाचल चैप्टर के अध्यक्ष हरीश अग्रवाल के अनुसार दवाओं का निर्यात बंद हो गया है। डिमांड भी कम हो गई है। उद्योगों को भुगतान नहीं हो रहा है। वित्तीय संकट के आसार बन गए हैं। हालात ऐसे ही रहे तो बेरोजगारी की समस्या बढ़ जाएगी और उद्योग जगत में भारी संकट छा जाएगा।
ब्लैक मार्केटिंग की वजह से दामों में उछाल
हिमाचल दवा निर्माता संघ के अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा कि फार्मा उद्योगों के पास दो तीन माह का स्टॉक तैयार है। उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। कालाबाजारी से दामों में उछाल आया है।
10 से 15 फीसदी का असर
उत्तर भारत की बड़ी ट्रक यूनियनों में शुमार द ट्रक ऑपरेटर यूनियन नालागढ़ के प्रधान विद्या रतन चौधरी ने कहा कि दो दिनों में ही माल ढुलाई 10 से 15 फीसदी गिरी है। हालात इसी तरह से बने रहे तो और गिरावट आएगी। ऐसे में ऑपरेटरों और मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।