करीब 15 से 18 फीट लंबी बनने वाली इस टनल में आर्टिफिशियल नोजल लगे होते हैं, जिनमें से सोडियम हाईपोक्लोराइट और पानी का मिश्रण एक स्प्रे की तरह बाहर निकलता है। लोग हाथ धोने के बाद टनल में जाते हैं और करीब तीन से पांच सेकंड के भीतर ही दूसरे दरवाजे से बाहर निकल जाते हैं। इससे लोगों के शरीर और कपड़ों पर लगा वायरस खत्म होने का दावा किया जाता है। तमिलनाडु में इस तरह की कई टनल स्थापित की जा चुकी हैं। चीन में भी ऐसी ही कई टनल बनने के बाद संक्रमण पर लगाम लगी है।
नगर निगम के कनिष्ठ अभियंता प्रवीण जिंटा की देखरेख में यह टनल बन रही है। जिंटा ने ही नगर निगम को टनल का आइडिया दिया था। इससे पहले उन्होंने फुट ऑपरेटिड सार्वजनिक नलके का आइडिया भी दिया। यदि टनल बनती है तो इसमें जिंटा का अहम योगदान रहेगा। निगम प्रशासन कह चुका है कि यदि ट्रायल सफल रहता है तो नगर निगम शहर में चार टनल स्थायी तौर पर स्थापित करेगा ताकि रोजाना कचरा उठाने के बाद सफाई कर्मचारी इस टनल से गुजरकर खुद को डिस्इंफेक्ट करने के बाद ही घर जाएं।