हिमाचल प्रदेश के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कोविड महामारी के दौरान मरीजों के उपचार में उपयोग होने वाला रेमडेसिविर इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। किसी भी जिले में इस इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि प्रदेश के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यकता और मांग के अनुसार इस इंजेक्शन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 6425 रेमडेसिविर इंजेक्शन स्टॉक में उपलब्ध हैं। इनमें से 23 सौ रेमडेसिविर इंजेक्शन स्वास्थ्य विभाग के राज्य भंडारण केंद्र में हैं। जबकि 4125 इंजेक्शन विभिन्नि जिलों को उपलब्ध करवाए गए हैं। जिला शिमला में सबसे ज्यादा एक हजार इंजेक्शन उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त मंडी जिले में 713, चंबा में 250, हमीरपुर में 250, सोलन में 534, कुल्लू में 238, सिरमौर में 400, ऊना में 120, बिलासपुर में 100 और कांगड़ा में 520 इंजेक्शन हैं।
हिमाचल में आवश्यक जीवनरक्षक की कमी नहीं
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. निपुण जिंदल का मनना है कि राज्य में महामारी की इस दूसरी लहर में मरीजों के जीवन को बचाने के लिए जीवनरक्षक दवाइयों, रेमडेसिविर इंजेक्शन व ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
वहीं, मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए भी सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। ऑक्सीजन का पर्याप्त उत्पादन है। ऑक्सीजन के भंडारण के लिए जरूर कमी है। इसके लिए केंद्र सरकार को खाली सिलिंडर भेजने को लिखा गया है। इसके लिए केंद्र सरकार से लगातार संवाद किया जा रहा है। मुख्य सचिव ने कहा कि तीसरी लहर की तैयारियों के लिए भी व्यवस्था कर रहे हैं। स्टाफ का भी प्रबंध कर रहे हैं। निश्चित रूप से इस बारे में ध्यान दे रहे हैं।
युवा अधिकारियोें की उपसमितियां भी बनाई गई हैं। दीर्घावधि योजना के लिए भी सोचना शुरू कर दिया गया है। वर्तमान में तो स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं। मगर अगर यूं ही मामले बढ़ते रहे तो चिंता की बात होगी। रेमडेसिविर दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यह सभी मरीजों को नहीं दी जाती। मुख्य सचिव ने कहा कि यह ऐसी महामारी है, जिसके बारे में बहुत से विशेषज्ञ बहुत बार गलत साबित हुए हैं। ऐसे में सजगता से ही इससे बचा जा सकता है। जब तक स्थिति संभलती नहीं है, तब तक ध्यान रखना होगा।