टांडा और शिमला मेडिकल कॉलेज के बाद अब एम्स)बिलासपुर में जल्द कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलेगी। इसे शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नेत्र बैंक शुरू करने के लिए करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं एम्स प्रबंधन ने कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा देने के लिए एक संकाय की भर्ती कर ली है। 80 फीसदी अत्याधुनिक उपकरण एम्स पहुंच चुके हैं। संस्थान में आई बैंक शुरू करने की 80 फीसदी औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली गई हैं।
अस्पताल भवन के ब्लॉक बी में आई बैंक बनाया जाएगा। प्रबंधन ने आई बैंक के स्टाफ की भर्ती के लिए उच्च अधिकारियों के समक्ष मांग रखी है। प्रबंधन का कहना है कि कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने और प्रयोगशाला बनाने के बाद पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आई बैंक शुरू करने के लिए कुछ औपचारिकताएं शेष हैं। इन्हें पूरा करने के बाद सुविधा शुरू हो जाएगी। संवाद
कॉर्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत कबः कॉर्निया प्रत्यारोपण को केराटोप्लास्टी या कॉर्नियल ग्राफ्ट के रूप में जाना जाता है। इसका उपयोग दृष्टि में सुधार, दर्द से राहत और गंभीर संक्रमण या क्षति के इलाज के लिए किया जा सकता है। कॉर्निया ट्रांसप्लांट के सबसे आम कारणों में से एक केराटोकोनस नामक स्थिति है, जिस कारण कार्निया का आकार बदल जाता है।